Tuesday , 15 June 2021

वैध ले-आउट से छेड़छाड़ करने वाले कॉलोनाइजर पर होगा केस

भोपाल (Bhopal) . मप्र नगरपालिका विधि संशोधन विधेयक 2021 में अवैध कॉलोनियां बनाने वालों को रोकने के साथ वैध कॉलोनियों में रहने वाले नागरिकों के अधिकारों को भी सुरक्षा दे दी गई है. वैध कॉलोनियों को लेकर इसमें दो प्रावधान किए गए हैं. पहला- यदि कॉलोनाइजर ने कॉलोनी में किसी तरह का विकास कार्य या सड़क अधूरी छोड़ी तो उस कॉलोनी में पड़े कॉलोनाइजर के खाली प्लॉट को मॉर्टगेज करके मिलने वाली राशि से वह कार्य पूरा होगा या राजस्व नियमों के तहत राशि की वसूली होगी. दूसरा- कॉलोनाइजर ने मंजूर ले-आउट का यदि उल्लंघन किया तो उसके खिलाफ एफआईआर (First Information Report) दर्ज होगी. सात साल तक सजा और दस लाख रुपए जुर्माना होगा.

फिर बदलेगी कट ऑफ डेट

राज्य सरकार (State government) ने वर्ष 1998 में मप्र कॉलोनाइजर नियम 1998 में नियम-15(क) बनाया था. इससे 30 जून 1998 तक की अवैध कॉलोनियों को वैध किया गया. इसके बाद 30 जून 2002 तक, 30 जून 2007 तक, 21 दिसंबर 2012 तक और आखिरी बार दिसंबर 2016 तक कट चुकी अवैध कॉलोनियों को वैध करने के फैसले लिए गए. इसी दौरान सरकार ने अवैध कॉलोनियों को वैध करने का फैसला लिया था. सावर्जनिक सूचना जारी हुई. नगरीय निकायों ने आपत्तियां सुनी. इसके बाद 1788 कॉलोनियों के ले-आइट, विकास शुल्क तय किए गए. इन कॉलोनियों से विकास शुल्क लेकर और राशि जमा कराने के बाद नियमितीकरण शुरू किया गया, लेकिन हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद 3 जून 2019 को राज्य शासन की धारा 15 (क) को रद्द कर दिया.

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