Monday , 8 March 2021

Whatsapp से आंतकियों का मोहभंग, तुर्किस कंपनी के मोबाइल एप इस्तेमाल कर रहे आंतकी और उनके आका

ये मोबाइल एप 2जी कनेक्टिविटी में भी बेहतर काम करते हैं

श्रीनगर (Srinagar) . वॉट्सएप की प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर मचे बवाल के बीच पाकिस्तानी आतंकी और उनके आकाओं आपस में चैट के लिए अब दूसरे मोबाइल एप का इस्तेमाल कर रहे हैं. अपनी आंतकी साजिशों को लीक होने से बचाने के लिए आतंकियों ने कई नए एप का इस्तेमाल शुरू किया है,जिस एक तुर्की की कंपनी को ओर से विकसित किया है. अधिकारियों ने यह जानकारी दी है. अधिकारियों ने बताया कि एनकाउंटर्स के बाद आतंकियों से मिले सबूतों और सेना के सामने आत्मसमर्पण करने वालों ने जो जानकारी दी है उसके आधार पर तीन नए मोबाइल एप सामने आए हैं, जिनके जरिए पाकिस्तान में आतंकी आपस में बातचीत कर आंतकवाद को बढ़ावा देते हैं.

सुरक्षा कारणों की वजह से इन एप का नाम नहीं सार्वजनिक किया गया है. इन एप में से एक अमेरिकी कंपनी की हैं, वहीं दूसरी यूरोपीय है. सबसे लेटेस्ट एप तुर्किस कंपनी की है, जिनका इस्तेमाल अक्सर आतंकवादियों और उनके हैंडलर्स के द्वारा कश्मीर घाटी में किया जा रहा है. इन एप की खासियत यह है कि इनका इस्तेमाल स्लो इंटरनेट या 2जी कनेक्टिविटी में भी हो सकता है. सरकार ने अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी किए जाने के साथ ही पूरे जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट पर रोक लगा दी थी. पिछले साल 2जी सर्विस शुरू की गई.

रक्षा अधिकारी ने बताया कि आतंकवादी समूहों ने वॉट्सएप और फेसबुक मैसेंजर का उपयोग करना बंद कर दिया था. बाद में पता चला कि उन्होंने इंटरनेट पर मौजूद अन्य मुफ्त मैसेजिंग एप का इस्तेमाल शुरू कर दिया है. इन एप में सभी एन्क्रिप्शन और डिक्रिप्शन (कोडिंग और डिकोटिंग) सीधे डिवाइस पर ही होते हैं, इसलिए, किसी भी पॉइंट पर तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप को कम करते हैं. ये एप आरएसए 2048 का एल्गोरिदम इस्तेमाल करते हैं जो को सबसे अधिक सुरक्षित इन्क्रिप्टेड प्लैटफॉर्म माने जाते हैं.

एक अधिकारी ने बताया कि घाटी में युवाओं को आतंकी राहों पर भेजने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे इन एप में से एक तो फोन नंबर या ईमेल आईडी की भी मांग नहीं करता है, ताकि यूजर की गोपनीयता बरकरार रहे. उन्होंने बताया कि इन ऐप्स को जम्मू-कश्मीर में ब्लॉक करने को लेकर प्रयास किए जा रहे हैं. यह उस समय में आया है जब घाटी में सुरक्षा एजेंसियां ​​वर्चुअल सिम कार्ड के खतरे से लड़ रही हैं. पाकिस्तान में अपने संचालकों से जुड़ने के लिए आतंकी समूह इनका इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं.

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