Tuesday , 13 April 2021

राज्य तय करेंगे सियासी पार्टियों की किस्मत

नई दिल्ली (New Delhi) . नए साल में देश के पांच राज्यों में अप्रैल मई में विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) होने हैं. ये पांच राज्य पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु (Tamil Nadu), केरल (Kerala), असम और पुडुचेरी केंद्रशासित प्रदेश देश की विभिन्न सियासी पार्टियों की किस्मत तय करेंगे. इन पांच राज्यों में से असम में भाजपा, पश्चिम बंगाल (West Bengal) में तृणमूल, केरल (Kerala) में लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट, तमिलनाडु (Tamil Nadu) में एआईएडीएमके और पुडुचेरी में कांग्रेस का शासन है. तृणमूल कांग्रेस ने 2016 में 294 सीटों में से 211 सीट जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया था. लेकिन 2019 के लोकसभा (Lok Sabha) चुनाव में भाजपा ने 42 में से 18 सीटें जीतकर सियासी पंडितों को चौका दिया था. इसके चलते 2021 का विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) ममता बनर्जी के लिए काफी मुश्किलों भरा होगा. देश में एकमात्र केरल (Kerala) ऐसा राज्य बचा है जहां लेफ्ट सत्ता में है. पिछले चुनाव में लेफ्ट गठबंधन एलडीएफ ने 140 में से 91 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी. केरल (Kerala) में एलडीएफ को कांग्रेस के गठबंधन वाले यूडीएफ के साथ भाजपा से भी कई जगहों पर चुनौती मिल रही है. असम में 2016 में भाजपा ने कांग्रेस को हराकर सत्ता काबिज की और सर्वानंद सोनोवाल मुख्यमंत्री (Chief Minister) बने.

2016 में हुए चुनाव में भाजपा ने 126 में से 60 सीटें जीती थी. वहीं भाजपा सहयोगी को असम गण परिषद ने 14 और बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट ने 12 सीटें जीती थीं. जबकि कांग्रेस सिर्फ 26 सीटें ही जीत सकी थी. यूपी और मध्य प्रदेश धर्मांतरण रोधी अध्यादेश के लागू होने पर विपक्ष ने इसपर काफी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. यूपी में धर्मांतरण रोधी अध्यादेश को राज्यपाल ने 27 नवंबर को मंजूरी दे दी. यूपी में धमकी देकर, डराकर या मजबूर करके धर्म परिवर्तन मामले में 5 साल की सजा और 15 हजार रुपये का अर्थदंड है. जबकि मध्य प्रदेश में 5 साल की सजा का प्रावधान है और 25 हजार रुपये का जुर्माना है. इसके साथ कर्नाटक (Karnataka) और हरियाणा (Haryana) ने भी धर्मांतरण रोधी कानून लाने का ऐलान किया है.

Please share this news