Tuesday , 19 January 2021

कई घंटों तक जीवित रहता है कोरोना वायरस, IIT-Mumbai के अनुसंधानकर्ताओं का दावा


नई दिल्ली (New Delhi) . कोरोना (Corona virus) पतली तरल परतों से चिपककर सतह पर जीवित बना रहता है. यह दावा ‎किया है आईआईटी-मुंबई (Mumbai) के अनुसंधानकर्ताओं के एक अध्ययन में. ताजा अध्ययन में जानकारी मिलती है कि दुनियाभर के लिए ‘जी का जंजाल’ बना यह घातक विषाणु ठोस सतहों पर कई घंटे और कई दिन तक कैसे अस्तित्व में बना रहता है. अध्ययन रिपोर्ट में नए कोरोना (Corona virus) के लंबे समय तक जीवित बने रहने के कारकों संबंधी जानकारी दी गई है.

अनुसंधानकर्ताओं ने कहा कि विभिन्न सतहों पर कोरोना (Corona virus) के जीवित बने रहने संबंधी जानकारी कोविड-19 (Covid-19) पर नियंत्रण में मदद कर सकती है. उन्होंने कहा कि हालिया प्रयोगों में पाया गया है कि सांस के जरिए निकले सामान्य कण जहां कुछ सेकेंड के भीतर सूख जाते हैं, वहीं सार्स-कोव-2 वायरस के अस्तित्व में रहने का मामला घंटों के क्रम से जुड़ा है.

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मुंबई (Mumbai) के प्रोफेसर अमित अग्रवाल ने कहा कि पतली परत संचरण का हमारा मॉडल दिखाता है कि सतह पर पतली तरल परत का मौजूद बना रहना या सूखना घंटों और दिनों के क्रम पर निर्भर है जो विषाणु सांद्रण के मापन के समान ही रहा है. अनुसंधानकर्ताओं ने उल्लेख किया कि किस तरह नैनोमीटर- तरल परत ‘लंदन वान डेर वाल्स फोर्स’ की वजह से सतह से चिपकती है, और इसी कारक की वजह से कोरोना (Corona virus) घंटों तक जीवित रह पाता है.

‘लंदन वान डेर वाल्स फोर्स’ परमाणुओं और अणुओं के बीच दूरी निर्भरता प्रतिक्रिया है जिसका नाम डच वैज्ञानिक जोहनेस डिडेरिक वान डेर वाल्स के नाम पर रखा गया है. बल के इस सिद्धांत में परमाणुओं, अणुओं, सतहों और अन्य अंतर-आण्विक बलों के बीच आकर्षण-विकर्षण शामिल है.

Please share this news