Thursday , 13 May 2021

धर्म और धरोहरें

 (लेखक- /अरविन्द प्रेमचंद जैन)
कोई भी धर्म, भाषा,समाज,संस्कृति तब तक संरक्षित रहता हैं जब तक उसे राज्याश्रय मिलता हैं आज जितने भी राजा हुए और जिनके वे धर्म को मानते रहे उन्होंने अपने कार्यकालों में बहुत ऐतहासिक मंदिरों,धरोहरों का निर्माण कराया. इन मंदिरों और धरोहरों में लिखे गए शिलालेखों से उनकी प्राचीनता, भव्यता प्रगट होती हैं. यह परम्परा हर देश और हर जाति,धर्म, वर्ग में रही हैं. इससे बोध होता हैं की उस समय की कलात्मकता,इतिहास कितना समृद्ध रहा. इससे यह भी बोध होता हैं उन दिनों भी ज्ञान,विज्ञान,आदि कितना विकसित रहा होगा. आज भी उनको देखकर हैरत होती हैं और लगता हैं की हमें प्राचीनता में नवीनता को सीखना चाहिए.
विश्व में प्राचीनतम धर्म हिन्दू, जैन बुद्ध,ईसाई मुस्लिम धर्म के अलावा अन्य धर्म जैसे पारसी आदि में भी प्राचीनता,भव्यता की धरोहरें हैं. उनके द्वारा उनकी पूजा पद्धति,रहन सहन आदि की भी जानकारियां मिलती हैं. इतिहास हमारे जीवन का बहुत महत्वपूर्ण अंग होता हैं बिना इतिहास जाने हम नया कुछ भी नहीं कर सकते.
हिन्दू धर्म एवं दर्शन सबसे प्राचीन एवं सनातन है. हिन्दू दर्शन एवं संस्कृति अक्षुण्ण तथा सकारात्मक को हृदयंगम करने एवं नकारात्मक को निष्कासित करने में सक्षम है. भारत की यह सशक्त संस्कृति ऐसी है कि मनुष्य तो क्या देवता भी यहाँ जन्म लेकर स्वयं को धन्य समझते रहे हैं. हमारी सांस्कृतिक धरोहर स्थापत्य कला, धार्मिक स्थल, प्राकृतिक विविधता, रीति-रिवाज तथा धर्म के रूप में देशी-विदेशी नागरिकों को अपनी ओर आकर्षित करती है. मनुष्य को अपनी संस्कृति से बहुत कुछ सीखने की प्रेरणा मिलती है. आज आवश्यकता है कि हम अपनी इन धरोहरों को सुरक्षित रखें ताकि इन्हें आने वाली पीढ़ी को हस्तांतरित कर सकें. यह हमारा कर्तव्य है कि पूर्वजों से चले आए इस क्रम को बनाए रखें. हिन्दू विधिशास्त्र के अंतर्गत धर्म एवं दर्शन से विधि का घनिष्ठ संबंध है. सामाजिक ढाँचा जो प्राचीन काल में धर्म, आचार एवं दर्शन पर आधारित था, विधि के स्वरूप को निर्धारित करने में अत्यधिक महत्त्वपूर्ण रहा है. इसीलिए हिन्दू विधिशास्त्रियों ने विधि की व्याख्या समाज, धर्म एवं दर्शन के संदर्भ में की है. हिन्दू विधि की रचना उन भारतीय मनुष्य द्वारा की गई थी जो कि मूलतः समाज-शास्त्री थे और एक अनुशासित समाज में व्यक्तियों के आचरण को नियमबद्ध करके लोक-कल्याण के उद्देश्य की पूर्ति करना चाहते थे. धर्म के अन्तर्गत मनुष्य के सभी धार्मिक, नैतिक, सामाजिक तथा विधिक कर्तव्य सम्मिलित हैं. इन कर्तव्यों की पूर्ति में संस्कृति का आधार मुख्य है. अतः हमें अपने धर्म एवं संस्कृति के अनुसार ढलना चाहिए.
भारत में यूनेस्को द्वारा निर्धारित कुल 37 धरोहर स्थल हैं जो इटली (54), चीन (53), स्पेन (47), फ़्रांस (44), जर्मनी (44) के बाद सर्वाधिक हैं. भारत दक्षिण एशिया का सबसे ज्यादा धरोहर स्थलों वाला देश है और चीन के बाद भारत में सबसे ज्यादा धरोहर स्थल हैं.
भारत के धरोहर स्थल इस प्रकार हैं-
सांस्कृतिक धरोहर स्थल
भारत में 29 सांस्कृतिक धरोहर स्थल हैं.
1- आगरा (Agra) का लाल किला
यह उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के आगरा (Agra) नगर में स्थित है. आगरा (Agra) का लाल किला अकबर द्वारा बनवाया गया. इसमें जहाँगीर, शाहजहाँ और औरंगजेब द्वारा बनवाई गयी इमारतें भी हैं. आगरा (Agra) के लाल किले को 1983 में युनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया.
2- अजंता की गुफाएँ
अजंता की गुफाएँ महाराष्ट्र (Maharashtra) प्रदेश के औरंगाबाद (Aurangabad) जिले में स्थित है. इनका निर्माण दूसरी शताब्दी से छठी शताब्दी तक हुआ. इनका अधिकांश निर्माण गुप्तकाल में हुआ. अजंता की गुफाओं की चित्रकारी बहुत खूबसूरत (Surat) है. इसमें 31 गुफाएँ हैं जो बौध्द धर्म से संबन्धित हैं. इन्हें 1983 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया.
3- एलोरा की गुफाएँ
एलोरा की गुफाएँ महाराष्ट्र (Maharashtra) के औरंगाबाद (Aurangabad) जिले में स्थित है. यह हिन्दू, बौध्द और जैन धर्म से संबन्धित हैं. इनका निर्माण छठी शताब्दी से दसवीं शताब्दी तक हुआ. इसमें राष्ट्रकूट राजा कृष्ण प्रथम द्वारा बनवाया गया कैलाश मंदिर बहुत प्रसिद्ध है जो एक विशाल चट्टान को काटकर बनवाया गया. एलोरा की गुफाओं को 1983 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया.
4- ताजमहल
ताजमहल उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के आगरा (Agra) नगर में स्थित है. यह एक मकबरा है और इसका निर्माण मुगल शासक शाहजहाँ ने अपनी बेगम मुमताज़ की याद में कराया. यह विश्व के सात आश्चर्यो में से एक है. यह सफ़ेद संगमरमर से बना है और इसे बनाने में 20 वर्ष का समय लगा. ताजमहल को 1983 में विश्व धरोहर घोषित किया गया.
5- कोणार्क का सूर्य मंदिर
यह ओडिशा के पुरी जिले के कोणार्क में स्थित है. यह सूर्य के रथ की तरह बनाया गया है. इसे ब्लैक पैगोड़ा भी कहा जाता है. इसे पूर्व गंग वंश के राजा नरसिंहदेव प्रथम ने बनवाया था. इसका निर्माण तेरहवीं सदी में हुआ. इसे 1984 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया.
6- महाबलीपुरम के स्मारक
महाबलीपुरम भारत के तमिलनाडू प्रदेश में स्थित है. यहाँ रथ मंदिर, मंडप, 11 गुफाएँ स्थित हैं जिनका निर्माण 7वीं और 8वीं सदी में हुआ. इन्हें 1984 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया.
7- गोवा के चर्च और कान्वेंट
ये गोवा के वेलहा गोवा में स्थित हैं. यहाँ कई चर्च और कान्वेंट स्थित हैं जो युनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किए गए हैं. इन्हें 1986 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया.
8- खजुराहो के स्मारक
खजुराहो मध्य प्रदेश में स्थित है. खजुराहो चंदेल वंश के राजपूत राजाओं की राजधानी थी जिनका राज्य बुंदेलखंड में था. इनका निर्माण 950 ई से 1050 ई तक हुआ. यह मुख्य रूप से हिन्दू और जैन धर्म से संबन्धित हैं. यहाँ 85 मंदिर स्थित हैं. इन्हें 1986 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया.
9- हम्पी के स्मारक
हम्पी कर्नाटक (Karnataka) के बल्लरी जिले में स्थित हैं. इनका निर्माण विजयनगर साम्राज्य के दौरान हुआ. हम्पी विजयनगर की राजधानी थी. यहाँ का विरूपाक्ष मंदिर बहुत प्रसिद्ध है. इन्हें 1986 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया.
10- फ़तेहपुर सीकरी
फतेहपुर सीकरी उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के आगरा (Agra) जिले में स्थित है. अकबर ने फ़तेहपुर सीकरी को अपनी राजधानी बनवाया. यहाँ अनेक इमारतें हैं जिनमें जामा मस्जिद, बुलंद दरवाजा, पंचमहल, सलीम चिश्ती का मकबरा प्रमुख हैं. इसे अंग्रेज़ यात्री राल्फ फिच ने 1585 में लंदन से बड़ा शहर बताया था. इसे 1986 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया.
11- पट्टदकाल के स्मारक
पट्टदकल कर्नाटक (Karnataka) के बगलकोट जिले में स्थित है. यह हिंदू और जैन धर्म के लिए प्रसिद्ध है. यहाँ शिव का पापनाथ मन्दिर और जैन धर्म का जैन नारायण मंदिर प्रसिद्ध है. इन्हें 1987 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया.
12- एलिफैण्टा की गुफाएँ
यह महाराष्ट्र (Maharashtra) में मुंबई (Mumbai) शहर से 10 किमी की दूरी पर स्थित हैं. इनका निर्माण 5वीं से 8वीं सदी के बीच हुआ. यह हिन्दू और बौध्द धर्म के लिए प्रसिद्ध हैं. इन्हें 1987 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया.
13- महान चोल मंदिर
ये तमिलनाडू में स्थित हैं. इनका निर्माण चोल साम्राज्य के दौरान हुआ. इनका निर्माण 11वीं और 12वीं सदी में हुआ. इसमें तंजावुर का बृहदेश्वर मन्दिर, दरसुरम का ऐरावतेश्वर मंदिर, गंगईकोंड का बृहदेस्वर मंदिर प्रसिद्ध हैं. इन्हें 1987 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया.
14- सांची के बुध्द स्मारक
यह मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल (Bhopal) से 45 किमी दूर स्थित है. इसमें अशोक द्वारा बनवाया गया सांची स्तूप बहुत प्रसिद्ध है. इन्हें 1989 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया.
15- हुमायूँ का मकबरा
हुमायूँ का मकबरा दिल्ली में स्थित है. इसे अकबर के समय हुमायूँ की विधवा हाजी बेगम ने बनवाया. इसका निर्माण 1572 में हुआ. इसे 1993 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया.
16- कुतुबमीनार और स्मारक
कुतुबमीनार दिल्ली में स्थित है. इसका निर्माण कुटुबुद्दीन ऐबक ने शुरू कराया और इलतुतमीश ने पूर्ण कराया. यह 238 फुट ऊंची मीनार है. इसके अलावा यहाँ महरोली का गुप्त स्तम्भ भी है जो गुप्तकाल का है. इस लौह स्तम्भ में आज तक जंग नहीं लगी है. यहाँ अलाई दरवाजा और कुतुब-उल-इस्लाम मस्जिद भी है. इन्हें 1993 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया.
17- भारत की पहाड़ी रेलवे
इसमें दार्जीलिंग हिमालय रेलवे (Railway)को 1999 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया. नीलगिरी पहाड़ी रेलवे (Railway)को 2005 में जबकि कालका-शिमला (Shimla) रेलवे (Railway)को 2008 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया.
18- महाबोधि मंदिर कॉम्प्लेक्स
यह बिहार (Bihar) के बोधगया में स्थित है. इसमें तीसरी सदी ईस्वी पूर्व, पाँचवीं सदी ईस्वी पूर्व, छठी शतबाड़ी और उन्नीसवीं शताब्दी में बनाए गए मंदिर हैं. सबसे पुराना मंदिर बोधिवृक्ष के पास अशोक द्वारा बनवाया गया मन्दिर है. इसके अलावा यहाँ अनेक मंदिर हैं. इन्हें 2002 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया.
19- भीमबेटका पत्थर की गुफाएँ
ये 30,000 साल पुरानी गुफाएँ हैं.यह मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में स्थित गुफाएँ हैं. इन्हें मध्य पाषाण काल की गुफाएँ बताया गया है. इन्हें 2003 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया.
20- छत्रपति शिवाजी टर्मिनस
यह मुंबई (Mumbai) में स्थित एक रेलवे (Railway)स्टेशन है जिसे ब्रिटिश काल में बनाया गया. यह मध्य रेलवे (Railway)का मुख्यालय है. यह 25,400 एकड़ में फैला हुआ है. इनको फ़्रेडरिक विलियम स्टीवन्स नमक आर्किटेक्ट ने डिजाइन किया था. 2 जुलाई 2004 को इसे युनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया.
21- चंपानेर पावागढ़ पुरातत्व उद्यान
इसमें प्राचीन हिन्दू साम्राज्य की राजधानी और आठवीं से सोलहवीं शताब्दी के अवशेष मौजूद हैं. इसमें पावागढ़ की पहाड़ी पर स्थित कालिका माता मंदिर है. इसे 2004 में विश्व धरोहर एसटीएचएल घोषित किया गया.
22- दिल्ली का लाल किला
दिल्ली का लाल किला शाहजहाँ द्वारा बनवाया गया. इसका नाम शाहजहानाबाद रखा गया. इसके पास सलीमगढ़ किला है, जिसे 1546 में इस्लाम शाह सूरी ने बनवाया. लाल किले का निर्माण 1639 से 1648 तक हुआ. लाल किला कॉम्प्लेक्स में लाल किला, सलीमगढ़ किला, दीवान-ए-खास, दीवान-ए-आम, मोती मस्जिद, नहर-ए- बेहिशीत स्थित हैं. इसे 2007 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया.
23- जंतर मंतर, जयपुर
इन्हें आमेर के राजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने बनवाया. इसे 1727 से 1734 तक बनवाया गया. इसका कार्य खगोलीय गणना करना है. इसे 2010 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया.
24- राजस्थान (Rajasthan)के पहाड़ी किले
इनका निर्माण सातवीं सदी से सोलहवीं सदी तक राजपूत राजाओं ने कराया. इसमें चित्तौड़गढ़ का किला, कुंभलगढ़ का किला, रणथंभौर का किला, आमेर का किला, जैसलमर का किला, गगरोन का किला प्रसिद्ध हैं. रणथंभौर का किला हमेशा अजेय रहा. इन्हें 2013 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया.
25- रानी की वाव
यह गुजरात (Gujarat) के पाटन जिले में स्थित है. यह एक बावड़ी (सीढ़ीदार कुआं) है. इसका निर्माण 1063 में सोलंकी वंश के राजपूत राजा भीमदेव प्रथम की स्मृति में रानी उदयमिती ने बनवाया. वाव की दीवारों और स्तंभों पर अधिकांश नक्काशियां, राम, वामन, महिषासुरमर्दिनी, कल्कि, आदि जैसे अवतारों के विभिन्न रूपों में भगवान विष्णु को समर्पित हैं. इसे 2014 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया.
26- नालंदा
नालंदा महाविहार स्थल बिहार (Bihar) के नालंदा जिले में स्थित है. इसका निर्माण 5वीं से 12वीं सदी के बीच हुआ. यहाँ स्तूप, विहार आदि स्थित है. इसके अलावा यहाँ नालंदा विश्वविद्यालय के अवशेष हैं जिसे बख्तियार खिलजी ने 10,000 बौध्द छत्रों की हत्या (Murder) करके नष्ट किया था. नालंदा को 2016 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया.
27- चंडीगढ़ कैपिटल कॉम्प्लेक्स
यह चंडीगढ़ के सेक्टर-1 में स्थित है. इसे ली कोर्बुजिए द्वारा डिजाइन किया गया था. यह 100 एकड़ में फैला हुआ है और इसमें पंजाब-हरियाणा (Haryana) का उच्च न्यायालय, सचिवालय जैसी 17 इमारतें हैं. इसे 2016 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया.
28- अहमदाबाद (Ahmedabad) का ऐतिहासिक नगर
यह गुजरात (Gujarat) के अहमदाबाद (Ahmedabad) में स्थित है. इसका निर्माण 15वीं सदी में गुजरात (Gujarat) सल्तनत के दौरान हुआ. सुल्तान अहमद शाह प्रथम ने इस नगर की स्थापना की. इसे 2017 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया.
29- ‘विक्टोरियन गोथिक’ और ‘आर्ट डेको’, मुंबई (Mumbai)
यह महाराष्ट्र (Maharashtra) की राजधानी मुंबई (Mumbai) में स्थित हैं. इनका निर्माण 1862 में हुआ. इसमें बॉम्बे हाइकोर्ट, राजबाई क्लॉक टावर, एरॉस सिनेमा, मुंबई (Mumbai) विश्वविद्यालय हैं. यह भारत की सबसे नई विश्व धरोहर है और इसे 30 जून 2018 को विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया है.
प्राकृतिक विश्व धरोहर स्थल
30- काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान
यह असम के काजीरंगा में स्थित है. यह 42,996 हेक्टेयर में फैला हुआ है. इसमें एक सींग वाले गेंडे काफी संख्या में हैं. इसे 1985 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया.
31- मानस वन्यजीव अभ्यारण्य
यह असम में मानस नदी के किनारे स्थित है. इसमें स्तनधारी वर्ग की 21 सर्वाधिक खतरे में स्थित प्रजातियाँ हैं. इसमें 55 स्तनधारी वर्ग की, 36 सरीसृप वर्ग की, 350 पक्षियों की प्रजातियाँ हैं. इसे 1985 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया.
32- केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान
यह राजस्थान (Rajasthan)के भरतपुर (Bharatpur) जिले में स्थित है. इसे 1982 में राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया. यहाँ पक्षियों की अनेक प्रजातियाँ हैं. इसे 1985 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया.
33- सुंदरबन राष्ट्रीय उद्यान
यह एक टाइगर रिजर्व है. यह भारत में 10,000 वर्ग किमी में फैला हुआ है. इसको 4 मई 1984 को राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया. इसे 1987 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया.
34- नन्दा देवी राष्ट्रीय उद्यान
यह उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित है. इसकी स्थापना 1982 में हुई. इसमें फूलों की घाटी का उद्यान भी है. इसे 1988 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया॥ 2005 में इसका पुनरविस्तार किया गया.
35- पश्चिमी घाट
इन्हें सहयाद्रि भी कहा जाता है. इन्हें 2012 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया. इसमें 20 धरोहर स्थल केरल (Kerala) में, 10 कर्नाटक (Karnataka) में, 5 तमिलनाडू और 4 महाराष्ट्र (Maharashtra) में हैं.
36- ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क
यह हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh)के कुल्लू में स्थित है. यह हिमालय जैव विविधता हॉटस्पॉट का भाग है. यह 90,540 हेक्टेयर में फैला हुआ है. इसे 2014 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया.
मिश्रित धरोहर स्थल
37- कंचनजंगा राष्ट्रीय उद्यान
यह भारत के सिक्किम प्रदेश में स्थित है. इसे 2016 में विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया.
इसके साथ जैन धर्म के धरोहर निम्म हैं —
1जैन लाल मंदिर –यह मंदिर दिल्ली में लाल किले के सामने स्थित हैं. दिल्ली का सबसे पुराना जैन मंदिर लाल किला और चांदनी चौक के सामने स्थित है. इसका निर्माण 1526 में हुआ था. … इसलिए यह लाल मंदिर के नाम से भी जाना जाता है. यहां कई मंदिर हैं लेकिन सबसे प्रमुख मंदिर भगवान महावीर का है जो जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर थे.
2 दिलवाड़ा का जैन मंदिर —दिलवाड़ा मंदिर या देलवाडा मंदिर, पाँच मंदिरों का एक समूह है. ये राजस्थान (Rajasthan)के सिरोही जिले के माउंट आबू (Mount Abu) नगर में स्थित हैं. इन मंदिरों का निर्माण ग्यारहवीं और तेरहवीं शताब्दी के बीच हुआ था. … दिलवाड़ा जैन मंदिर परिसर में पांच मंदिर संगमरमर का है.
3 पालीताना जैन तीर्थ पालिताना मंदिर जैनियों के सबसे पवित्र तीर्थ स्थान के रूप में माना जाता है. ये शत्रुंजय पहाड़ियों की चोटी पर स्थित 3000 से अधिक मंदिरों का एक समूह है, जो विशेष तौर पर संगमरमर में खुदे हुए हैं. पहाड़ी की चोटी पर मुख्य मंदिर 1 तीर्थंकर भगवान आदिनाथ (ऋषिदेव) को समर्पित है.
4 नाकोड़ा जी मंदिर — नाकोड़ा जैन मंदिर तीसरी शताब्दी में निर्मित एक प्राचीन मंदिर है जिसका कई बार जीर्णोद्धार किया गया है. नाकोड़ा जैन मंदिर में पार्श्वनाथ की लगभग 58 सेमी ऊँची मूर्ति कमल की स्थिति में विराजमान है. नाकोड़ा जैन मंदिर का प्राचीन नाम वीरमपुर नगरी था, क्योंकि माना जाता है तीसरी शताब्दी के दौरान वीरसेन और नकोर्सन ने इस परम पावान मंदिर का निर्माण किया था. जो जैन समुदाय के लिए के प्रमुख आस्था केंद्र है
5 ओसियां जी मंदिर —ग्राम के अंदर जैन तीर्थंकर महावीर का एक सुन्दर मन्दिर है, जिसे वत्सराज (770-800 ई.) ने बनवाया था. यह परकोटे के भीतर स्थित है. इसके तोरण अतीव भव्य हैं तथा स्तंभों पर तीर्थंकरों की प्रतिमाएं हैं.
6 जैसलमेर (Jaisalmer) जैन मंदिर –ऐसा माना जाता है कि लौद्रवा की स्थापना लोद्र्( लोधी) राजपूतों द्वारा की गई थी. यह मंदिर काफी प्राचीन है तथा समय-समय पर इसका जीर्णोधार होता रहा है. … मंदिर में प्रवेश करते ही चौक में एक भव्य पच्चीस फीट ऊँचा कलात्मक तोरण स्थित है.
7 जैन मंदिर अमर सागर —जैसलमेर (Jaisalmer) और लौद्रवा के बीच अमरसागर एक रमणिक स्थान है. अमरसागर मंदिर, तालाब तथा उद्यान का निर्माण महारावल अमरसिंह द्वारा विक्रम संवत् 1721 से 1751 के बीच किया गया था. यहाँ आदिश्वर भगवान के तीन जैन मंदिर है. ये सभी 19 वीं शताब्दी की कृतियां हैं. इनसे यह तो स्पष्ट है कि जैसलमेर (Jaisalmer) क्षेत्रा में जैन स्थापत्य परंपरा का अनुसरण 19 वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध तक होता रहा. अमर सागर के किनारे भगवान आदिश्वर का दो मंजिला जैन मंदिर है. इस मंदिर का निर्माण सेठ हिम्मत राम बाफना द्वारा 1871 ई. में हुआ था. यहाँ इस मंदिर के स्थापत्य पर कुछ अंशों में हिन्दु-मुगल शैली का सामंजस्य है. मंदिर में बने गवाक्ष, झरोखें, तिबारियाँ तथा बरामदों पर उत्कीर्ण अलंकरण बंे मनमोह है, यहाँ मुख चतुस्कि के स्थान पर जालीदार बरामदा स्थित है और रंगमंडप की जगह अलंकरणों से युक्त बरामदा का निर्माण हुआ है. दूसरी मंजिल पर चक्ररेखी शिखर के दोनो पाश्वों में मुख-चतुस्कि जोड् दी गई है.
8 श्रीमहावीर जी – महावीर जी मंदिर जैन धर्म का एक प्रमुख तीर्थ स्थल है. यह मंदिर राजस्थान (Rajasthan)में करौली जिले के हिंडौन ब्लॉक में स्थित है. आपको बता दें कि इस मंदिर के अस्तित्व की एक लंबी ऐतिहासिक कहानी है. महावीर जी मंदिर एक बाड़े में स्थित है जिसको काताला के नाम से जाना जाता है.
9 जैन तीर्थ कर्णाटक —श्रवणबेलगोला : यह प्राचीन तीर्थस्थल भारतीय राज्य कर्नाटक (Karnataka) के मड्या जिले में श्रवणबेलगोला के गोम्मटेश्वर स्थान पर स्थित है. यहां पर भगवान बाहुबली की विशालकाय प्रतिमा स्थापित है, जो पूर्णत: एक ही पत्थर से निर्मित है. इस मूर्ति को बनाने में मूर्तिकार को लगभग 12 वर्ष लगे. बाहुबली को गोमटेश्वर भी कहा जाता था.
श्रवणबेलगोला में गोम्मटेश्वर द्वार के बाईं ओर एक पाषाण पर शक सं. 1102 का एक लेख कानड़ी भाषा में है. इसके अनुसार ऋषभ के दो पुत्र भरत और बाहुबली थे. ऋषभदेव के जंगल चले जाने के बाद राज्याधिकार के लिए बाहुबली और भरत में युद्ध हुआ. बाहुबली ने युद्ध में भरत को परास्त कर दिया. लेकिन इस घटना के बाद उनके मन में भी विरक्ति भाव जाग्रत हुआ और उन्होंने भरत को राजपाट ले लेने को कहा, तब वे खुद घोर तपश्चरण में लीन हो गए. तपस्या के पश्चात उनको यहीं पर केवल ज्ञान प्राप्त हुआ. भरत ने बाहुबली के सम्मान में पोदनपुर में 525 धनुष की बाहुबली की मूर्ति प्रतिष्ठित की. प्रथम सबसे विशाल प्रतिमा का यहां उल्लेख है.
10 पावापुरी जैन तीर्थ —पावापुरी में स्थित “जल मंदिर” राजगीर और बोधगया के समीप पावापुरी भारत के बिहार (Bihar) प्रान्त के नालंदा जिले मे स्थित एक शहर है. यह जैन धर्म के मतावलंबियो के लिये एक अत्यंत पवित्र शहर है क्यूंकि माना जाता है कि भगवान महावीर को यहीं मोक्ष की प्राप्ति हुई थी. यहाँ के जलमंदिर की शोभा देखते ही बनती है.
11 जैन मंदिर लाडनू —-दिगंबर जैन बाड़ा मंदिर लाडनू का एक प्रसिद्ध पर्यटक आकर्षण है. यह मंदिर जैन तीर्थंकरों की सुंदर मूर्तियों, उत्कीर्ण खंभे, कला एवं प्राचीन जैन पांडुलिपियों के दुर्लभ संग्रह के लिए प्रसिद्ध है. मंदिर के एक दरवाजे पर लिखे शिलालेख के अनुसार, इसका निर्माण सन 1136 में आषाढ़ शुक्ल 8 में किया गया था.
12 सम्मेद शिखर जी —शिखरजी या शिखरजी या पारसनाथ पर्वत भारत के झारखंड राज्य के गिरिडीह ज़िले में छोटा नागपुर पठार पर स्थित एक पहाड़ी है जो विश्व का सबसे महत्वपूर्ण जैन तीर्थ स्थल भी है. माना जाता है कि 24 में से 20 जैन ने पर मोक्ष प्राप्त किया था. … 1,350 मीटर (4,430 फ़ुट) ऊँचा यह पहाड़ झारखंड का सबसे ऊंचा स्थान भी है.
13 जैन तीर्थ गिरनार जी –भारत के गुजरात (Gujarat) राज्य के जूनागढ़ जिले स्थित पहाड़ियाँ गिरनार नाम से जानी जाती हैं. यह जैनों का सिद्ध क्षेत्र है यहाँ से नारायण कृष्ण के सबसे बड़े भ्राता तीर्थंकर भगवन देवादिदेव 1008 नेमीनाथ भगवान ने मोक्ष प्राप्त किया है यह अहमदाबाद (Ahmedabad) से 327 किलोमीटर की दूरी पर जूनागढ़ के 10 मील पूर्व भवनाथ में स्थित हैं.
14 जैन मंदिर खजुराहों —चंदेल वंश द्वारा 950 – 1050 CE के बीच निर्मित, खजुराहो मंदिर भारतीय कला के सबसे महत्वपूर्ण नमूनों में से एक हैं. … पूर्वी समूह के मंदिरों में जैन मंदिर चंदेला शासन के दौरान क्षेत्र में फलते-फूलते जैन धर्म के लिए बनाए गए थे. पश्चिमी और दक्षिणी भाग के मंदिर विभिन्न हिंदू देवी-देवताओं को समर्पित हैं.
15 कुण्डलपुर दमोह कुण्डलपुर भारत में जैन धर्म के लिए एक ऐतिहासिक तीर्थ स्थल है. यह मध्य प्रदेश के दमोह जिले में दमोह शहर से 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित कुंडलगिरी में है. कुण्डलपुर में बैठे (पद्मासन) आसन में बड़े बाबा (आदिनाथ) की एक प्रतिमा है.
जामा मस्जिद दिल्ली — जामा मस्जिद अर्थात शुक्रवार (Friday) की मस्जिद, दिल्‍ली दुनिया की सबसे बड़ी और संभवतया सबसे अधिक भव्‍य मस्जिद है. यह लाल किले के समाने वाली सड़क पर है. पुरानी दिल्‍ली की यह विशाल मस्जिद मुगल शासक शाहजहां के उत्‍कृष्‍ट वास्‍तुकलात्‍मक सौंदर्य बोध का नमूना है, जिसमें एक साथ 25,000 लोग बैठ कर प्रार्थना कर सकते हैं.
कैथेड्रल चर्च ऑफ़ केरल (Kerala) – सुमी बैप्टिस्ट ज़ूनहेबोटो चर्च भारत के नागालैंड राज्य में स्थित है. इसे भारत का सबसे बडा चर्च माना जाता है. कहते हैं की इस चर्च के निर्माण में करीव 36 करोड़ रुपए की लागत आई थी. इस चर्च का निर्माण लोगों के द्वारा दिये गये दान से बनाया गया है.
साँची का स्तूप — सांची का महान मुख्य स्तूप, मूलतः सम्राट अशोक महान ने तीसरी शती, ई. पू. में बनवाया था. इसके केन्द्र में एक अर्धगोलाकार ईंट निर्मित ढांचा था, जिसमें भगवान बुद्ध के कुछ अवशेष रखे थे.
ज़ोरेस्ट्रियन मंदिर –अब भारत में पारसियों को जहां भी कहीं प्रार्थना स्थल है, उसे आतिश बेहराम या दर-ए मेहर कहा जाता है. आतिश इसलिए की पारसी धर्म के लोग अग्नि पूजक है. फारसी में आतिश का अर्थ अग्नि होता है. अंग्रेज़ी इसे फ़ायर टेम्पल (fire temple) अग्नि मंदिर कह सकते हैं.
उपरोक्त संक्षिप्त विवरण से भारत की प्राचीनतम संस्कृति का बोध होता हैं इसके अलावा अन्य बहुत धरोहरें हैं जिनका लेख एक लेख में किया जाना संभव नहीं हैं. जितनी अधिकतम जानकारी दी जाना हैं दी गयी हैं. यह पूर्णता नहीं हैं मात्र बानगी हैं.

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