Friday , 16 April 2021

किसान आंदोलन की मुख्य वजह- पंजाब भाजपा की लापरवाही

जालंधर . कृषि कानूनों के विरोध में करीब एक महीने से दिल्ली के बॉर्डर पर किसान धरने पर बैठे हैं. आंदोलन के कारण पंजाब (Punjab) से लेकर दिल्ली तक के लोगों पर किसी न किसी तरह से असर जरूर पड़ रहा है. अगर किसी पर असर नहीं पड़ा है तो वह है पंजाब (Punjab) भाजपा की टीम. मामले को संभालने में पंजाब (Punjab) भाजपा की टीम पूरी तरह से विफल साबित हुई है.

आंदोलन में दिल्ली जाने से पहले पंजाब (Punjab) में किसान रेल ट्रैक पर बैठे रहे तथा इस दौरान पंजाब (Punjab) में भाजपा के पास एक मौका था कि वह किसी तरह से किसान अंदोलन में शामिल संगठनों के लोगों के साथ सम्पर्क कर उन्हें आला नेताओं के साथ बात करवाकर मामले को खत्म करवाने की कोशिश कर सकती थी. खुद भाजपा का वर्कर कह रहा है कि पार्टी मामले को पंजाब (Punjab) में संभाल लेती तो इतना बड़ा तूफान न उठता. इसकी पोल हाल ही में सोशल मीडिया (Media) पर भाजपा की एक पोस्ट ने खोल दी है. सूत्रों के मुताबिक पंजाब (Punjab) भाजपा प्रभारी दुष्यंत गौतम ने इस मामले में कई नेताओं की कुछ समय पहले खिंचाई भी की है तथा उन्हें बेवजह की बयानबाजी बंद रखने को कहा है. भाजपा जो पंजाब (Punjab) में 117 सीटों पर जीत हासिल कर सरकार बनाने की बात कर रही थी, उसी भाजपा के खुद के आला नेता नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर साफ कह रहे हैं कि पंजाब (Punjab) में भाजपा कम से कम 10 साल पीछे चली गई है.

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