Wednesday , 23 June 2021

निजी हॉस्पिटल्स फिर लूट पर उतारू

जबलपुर, 25 मार्च . शहर में अचानक कोरोना के मरीजों के सामने आने के बाद आनन-फानन में वर्तमान में एक दिन के लॉक डाउन की घोषणा की गई है जिससे सभी सन्न रह गए. पिछले लॉकडाउन (Lockdown) की मार से अभी लोग उबर भी नहीं पाए हैं कि उन्हें एक बार फिर चिंता सताने लगी है कि पिछली बार जनता कर्फ्यू (Curfew) के नाम से शुरुआत के बाद जिस तरह लॉकडाउन (Lockdown) और अघोषित कर्फ्यू (Curfew) की शुरूआत हुई थी उसकी पुनरावृत्ति न हो जाए. इस बीच आपदा में अवसर तलाशने की फिराक में मरीजों पर गिद्ध दृष्टि जमाए निजी हॉस्पिटल्स संचालकों की बांछे खिल गई हैं एक बार फिर मरीजों को इन अस्पतालों में लूट प्रारंभ हो गई है. शासकीय अस्पतालों में समुचित उपचार के अभाव जहाँ लोगों को खल रहा है कि वहीं एक बार फिर कोरोना का प्रकोप बढ़ने से कुछ दवाओं के साथ मास्क और सैनेटाईजर की मांग एक बार फिर बढ़ गई है.

जनता को लूटने में कसर नहीं छोड़ रहे कुछ व्यापारी…………

अत्यावश्यक सेवाओं के नाम पर न सिर्फ कुछ दवा व्यवसायियों ने शहर की जनता को लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. कमी के नाम पर दवाओं के साथ मास्क, सैनिटाईजर फिर एक बार मनमानी कीमतों पर बेचे जा रहे हैं. सैनीटाइजर और मास्क तो दोगुनी, चौगुनी कीमतों पर बिकें इससे पहले ही लोग खरीदी करने दुकानों में पहुंच रहे हैं, सूत्रों की मानें तो अचानक डेटॉल शहर से गायब ही हो गया है.

डॉक्टर (doctor) स्प्रिट के बाद गायब हुआ डेटॉल………….

विगत वर्ष लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान बाजार से डॉक्टर (doctor) स्प्रिट तो लगभग गायब थी जबकि सैनिटाईजर के नाम पर भी दवा व्यापारियों ने प्रिंट रेट से अधिक कीमतों पर लाभ कमाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे थे इसी बीच शहर के दवा मार्केट से अचानक डेटाल गायब हो गया. आलम ये है कि पहले लॉक डाउन और अब कर्फ्यू (Curfew) की छूट के दौरान बाजार में भगदड़ का सा माहौल निर्मित हो रहा है. मुख्य किराना दुकानदारों के द्वारा सामान न आने की व्यथा भी बताई जा रही है वहीं आपूर्ति के लिए गली मौहल्लों की कुलियों में छुटपुट किराना व्यवसायी मनमानी कीमतों पर सामान बेच रहे हैं. जनता को यह चिंता सता रही थी कि न जाने कितने दिनों तक दुकानें खुलें वे इस लूट का मौन होकर शिकार होते रहे और दवा कारोबारियों, सब्जी कारोबारियों के साथ कुछ व्यवसायियों ने इस घड़ी में भी मुनाफा कमाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं.

फिर बिक रही सरकारी निजी कंपनियों की बीमा पॉलिसी………………..

वर्तमान परिदृश्य में लोगों को पहली बार ऐसा लग रहा है कि वे कल हों न हों, लिहाजा मौके का फायदा उठाकर निजी और सरकारी बीमा कंपनियों के विज्ञापन भी धड़ल्ले से आ रहे हैं. बीमा अदायगी में डिफॉल्टर से डिफॉल्टर कंपनियां भी तत्काल भुगतान का दंभ भर रहीं हैं. सक्षम व्यक्तियों द्वारा मरता क्या न करता की तर्ज पर बीमा पॉलिसियां अंधाधुंध ली जा रही हैं. जानकारों का कहना है कि सब कुछ इतना सुनियोजित तरीके से चल रहा है जैसे कोई षड़यंत्र रच कर लोगों को पॉलिसी लेने विवश किया जा रहा हो.

नहीं मिल पा रहा उचित उपचार…………..

वैक्सीनेशन के बाद किसी लापरवाही की वजह से कोरोना होने की वजह से उपचार के लिए भर्ती मरीजों का आरोप है कि शासकीय अस्पतालों में उन्हें उचित उपचार नहीं मिल पा रहा है. जिसके चलते अधिकांश को निजी अस्पतालों की शरण लेनी पड़ रही है. पीड़ितों की मांग है कि कम से कम शासकीय अस्पतालों में कोरोना मरीजों के उपचार को गंभीरता से लिया जाना चाहिए. स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की मानें तो विगत वर्ष की तरह इस वर्ष भी निजी अस्पतालों में कोरोना मरीजों के साथ लूट खसोट में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है. निजी हॉस्पिटलो में वैक्सीनेशन के नाम पर ही नहीं लोगों को कोरोना उपचार के नाम पर विभिन्न अनावश्यक टेस्ट के नाम पर लूटा जा रहा है.

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