Friday , 14 May 2021

राजस्‍थान में ओपन जेलें खस्ता हालत में


जयपुर (jaipur) . अच्छे आचरण वाले कैदियों को कडी सजा में राहत देने के फैसले के साथ ही इन कैदियों को खुली ओपन जेल में शिफ्ट किया जाता है मगर राज्य की खुली ओपन जेले आज टीन की छत के साथ दीवारे जर्जर हालत में है जिसका खामियाजा कैदियों के साथ रह रहे उनके परिवारों को उठाना पड रहा है.
टिन टप्पर से बने ये मकान, ओपन जेल के कैदियों को मुहैया कराए गए है मकसद था कि अच्छे आचरण वाले कैदी अपने परिवार के साथ रह सकेंगे वक्त गुजार सकेंगे और अच्छी जिंदगी की ओर आगे बढ़ सकेंगे, लेकिन अभी तक सरकार का ये फैसला कैदियों और उनके परिवारों पर ही भारी पड़ता रहा.

कैदियों के साथ उनके परिजन भी इन टिन टप्पर वाले मकानों में बदहाल जिंदगी जी रहे है. इन मकानों में कैदियों और उनके परिजनों के लिए बरसात में टपकती छत, सर्दी से हाड कम्पाती शीत लहर और तेजगर्मी में झुलसना ही नियति बन गया है. कारण साफ है ओपन जेल में बने मकानों में टिन टप्पर की छत के साथ ही ईंटों से बनी दीवारें जर्जर हो गई है. ऐसे में रहने में भी खतरा महसूस होता है, लेकिन ये परिवार सजा काट रहे है कहने को राजस्थान (Rajasthan)ओपन जेल अवधारणा को फलीभूत करने के मामले में देश में अग्रणी राज्यों में शामिल है, लेकिन देखा जा रहा है कि खुला बंदी शिवरों में स्थानांतरण के लिए स्वीकृत संख्या के अनुपात से भी कम बंदी ही जा पा रहे हैं. इसका सबसे बड़ा कारण ओपन जेलों में बंदी आवास गृह जर्जर अवस्था में होना है.

खुद जेल प्रशासन का मानना है कि इनमें बंदी और उनका परिवार निवास नहीं कर सकता है. ऐसे में जेल महानिदेशालय की ओर से सरकार को भेजे गए. इनके लिए पक्के क्वार्टर बनाने की मांग की गई है. जेल प्रशासन ने पहले चरण में ओपन जेल में 275 बंदी आवास गृह बनाए जाने का प्रस्ताव दिया है. ओपन जेल नियम 2019 के उपनियम 72 के तहत अब स्पष्ट प्रावधान किया हुआ है कि खुली जेल में बंदियों को अस्थाई आवास के लिए उपयुक्त आवास व्यवस्था की जाए, लेकिन प्रदेश की सभी ओपन जेलों में बंदी आवासों की हालत जर्जर हैं. वहीं, ओपन जेल जैतसर में तो एक भी सरकारी आवास और कार्यालय तक नहीं है.

Please share this news