Thursday , 13 May 2021

एनजीटी से यूपी सरकार को फटकार, कहा- प्रदूषण अपराध को रोकें

नई दिल्ली (New Delhi) . राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) ने गंगा में मिलने वाली नदियों में अनुपचारित सीवेज के गिरने को लेकर उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) सरकार को जमकर फटकार लगाई. एनजीटी ने कहा कि ऐसा कोई भी संकेत नहीं मिलता है कि इस ‘प्रदूषण अपराध’ को राज्य सरकार (State government) द्वारा कैसे रोका जाएगा. हालात को बहुत ही असंतोषजनक करार देते हुए जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली एनजीटी की एक पीठ ने कहा कि गोरखपुर में रामगढ़ ताल के साथ ही आमी, राप्ती और रोहिणी नदियों के प्रदूषण को खत्म करने के लिए सुधारात्मक कार्रवाई किए जाने की जरूरत है.

एक समिति द्वारा दाखिल रिपोर्ट का अवलोकन करते हुए पीठ ने कहा कि अधिकारियों द्वारा अपनी सार्वजनिक कर्तव्यों के अनुपालन में घोर लापरवाही बरती जा रही है. पीठ ने कहा कि यही उपयुक्त समय है कि मुख्य सचिव ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, गंगा के कायाकल्प, अनुपचारित सीवेज के डिस्चार्ज को रोकने संबंधी सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) के निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए मामले की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा करें. एनजीटी ने यूपी के मुख्य सचिव को आमी, राप्ती, रोहिणी, सरयू और घाघरा नदियों के कायाकल्प योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी करने का निर्देश दिया और आवश्यक बजटीय मदद के साथ कायाकल्प के लिए समयसीमा तय करने और इसके लिए अधिकारियों की जवाबदेही तय करने को भी कहा.

पीठ ने कहा कि इस तरह की परियोजनाओं में स्वच्छ गंगा के लिए राष्ट्रीय मिशन के जरिए वित्तीय मदद के बहाने देरी नहीं की जा सकती है. गंगा या अन्य जल निकायों में प्रदूषण के निर्वहन को नहीं रोकना जल अधिनियम के तहत आपराधिक अपराध है और सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) के फैसले के तहत ऐसे अपराधों के लिए जवाबदेह अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाया जा सकता है.

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