Saturday , 15 May 2021

नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ज्ञवाली ने कहा कि नेपाल अपनी घरेलू राजनीति में कभी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं करेगा

नई दिल्ली (New Delhi) . नेपाल के विदेश मंत्री प्रदीप कुमार ज्ञवाली ने कहा कि नेपाल अपनी घरेलू राजनीति में कभी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं करेगा क्योंकि वह अपनी आंतरिक समस्याओं को संभालने में सक्षम है. ज्ञवाली का यह बयान नेपाल की संसद भंग होने के बाद इस पड़ोसी देश में पैदा हुए राजनीतिक संकट में चीन के हस्तक्षेप करने की पृष्ठभूमि में आया है. ज्ञवाली ने तीन दिवसीय भारत दौरे के समापन पर यह भी कहा कि सीमा संबंधी मुद्दे के समाधान के लिए नयी दिल्ली और काठमांडू की साझा प्रतिबद्धता है और दोनों ही पक्ष इसका हल निकालने के तरीकों पर विचार कर रहे हैं.

ज्ञवाली ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर से बातचीत की थी. उन्होंने कहा कि नेपाल के भारत और चीन दोनों देशों के साथ अच्छे संबंध हैं और वह कभी एक-दूसरे इन दोनों देशों के साथ संबंधों की तुलना नहीं करता है. नेपाल में राजनीतिक संकट को कम करने के नाम पर चीन की ओर से किए जा रहे प्रयासों के बारे में पूछे जाने पर नेपाली विदेश मंत्री ने कहा, हम अपनी घरेलू राजनीति में कभी हस्तक्षेप स्वीकार नहीं करते. हम अपनी समस्याओं के समाधान में सक्षम हैं. करीबी पड़ोसी (देश) होने के नाते कुछ चिंताएं या सवाल हो सकते हैं, लेकिन हम कभी दखल मंजूर नहीं करते.

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के संसद को भंग करने और सत्तारूढ़ नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी (एनसीपी) में आंतरिक विवाद के बीच नए सिरे से चुनाव कराने के फैसले के बाद पिछले महीने वहां राजनीतिक संकट गहरा गया था. संकट गहराने के बीच चीन ने हड़बड़ी में चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) के अंतरराष्ट्रीय विभाग के उप मंत्री गुओ येझोऊ की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय दल को एनसीपी के प्रतिद्वंद्वी गुटों से बातचीत के लिए काठमांडू भेजा था. नेपाल के राजनीतिक घटनाक्रम में चीन की दखलंदाजी पर नेपाल से कड़ी प्रतिक्रिया आई. ज्ञवाली ने कहा कि नेपाल के रिश्ते भारत और चीन दोनों के साथ बहुत अच्छे हैं और वह कभी एक दूसरे के साथ संबंधों की तुलना नहीं करता है.

एनसीपी नेता पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड ने आरोप लगाया है कि ओली ने भारत के इशारे पर सत्तारूढ़ पार्टी को विभाजित किया और संसद को भंग कर दिया. हालांकि, इस बारे में पूछे जाने पर ज्ञवाली ने सीधा जवाब नहीं देते हुए कहा कि नेपाल के विदेश मंत्री के रूप में वह नेपाल में प्रचंड समेत सभी का प्रतिनिधित्व करते हैं. ज्ञवाली ने एक वार्ता में 1950 की भारत-नेपाल शांति और मित्रता संधि की जल्द समीक्षा की वकालत की और भारत के साथ उनके देश के बढ़ते व्यापार घाटे पर चिंता जताई. क्या नेपाल कोरोना (Corona virus) का टीका भारत और चीन दोनों से खरीदने पर विचार कर रहा है, इस प्रश्न पर ज्ञवाली ने कहा कि टीकों की आपूर्ति को वैश्विक सार्वजनिक वस्तु के तौर पर देखा जाना चाहिए और फैसला लेते समय वैज्ञानिक पहलू को देखा जाना चाहिए, ना कि राजनीतिक फैसले को.

उन्होंने कहा कि नेपाल में टीकों की किफायत, उपलब्धता और तत्परता तथा टीकों के भंडारण के सक्षम बुनियादी ढांचे के आधार पर टीकों की खरीद संबंधी फैसले लिए जाएंगे. जयशंकर और ज्ञवाली ने शुक्रवार (Friday) को अपनी वार्ता में सीमा प्रबंधन, संपर्क, व्यापार, ऊर्जा, तेल तथा गैस, जल संसाधन, क्षमता निर्माण और पर्यटन समेत द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं पर गहन समीक्षा की थी. सीमा विवाद के बाद रिश्तों में तनाव आने के बाद दोनों पक्षों के बीच यह पहली उच्चस्तरीय वार्ता थी.

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