Monday , 28 September 2020

कोरोना संक्रमण के 71 हजार से ज्यादा नए मामले, मृतकों की संख्या 61 हजार के पार


नई दिल्ली (New Delhi) . गुरुवार (Thursday) को एक बार फिर रात 10 बजे तक 71,267 नए कोरोनावायरस संक्रमित मरीज मिलने के साथ देश में पीड़ितों की संख्या बढ़कर 33 लाख 79 हजार 16 हो गई. मृतकों की संख्या के मामले में अब भारत अब जल्द ही मेक्सिको को पीछे छोड़ सकता है. 1035 नई मौतों के साथ ही देश में कोरोनावायरस से मरने वालों की संख्या 61,664 हो गई है. बीते एक सप्ताह से प्रतिदिन लगभग 60 हजार के करीब मरीज कोरोनावायरस संक्रमण से मुक्त भी हो रहे हैं. अब तक 25 लाख 80 हजार 797 मरीजों को कोरोनावायरस से मुक्ति मिल चुकी है. जिस रफ्तार से भारत में संक्रमण बढ़ रहा है उसे देखते हुए आशंका है कि भारत जल्द ही ब्राजील को भी पीछे छोड़ देगा. लगातार 70 हजार नए मरीज प्रतिदिन मिलने के कारण भारत में कोरोना के आंकड़े अब भयानक हो गए हैं.

महाराष्ट्र (Maharashtra) जैसे राज्यों में कोरोना अनियंत्रित हो चुका है. यहां गुरुवार (Thursday) को एक बार फिर 14,887 नए संक्रमित मिलने के साथ पीड़ितों की संख्या बढ़कर 7,33,568 हो गई. इनमें से 23,444 की मौत हो चुकी है जबकि 5,31,563 ठीक हो चुके हैं. गुरुवार (Thursday) को तमिलनाडु में 5981, आंध्र प्रदेश (Andra Pradesh)में 10,621, कर्नाटक (Karnataka) में 9386, उत्तरप्रदेश (Uttar Pradesh) में 5391, दिल्ली में 1840, पश्चिम बंगाल (West Bengal) में 2009, बिहार (Bihar)में 1860, तेलंगाना में 2795, गुजरात में 1190, ओडिशा में 3384, केरल में 2406, हरियाणा (Haryana) में 1294, मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में 1317, पंजाब (Punjab) में 1746 और छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में 1108 नए कोरोना संक्रमित मरीज मिले. यह वे राज्य हैं जहां पर नए पीड़ितों की संख्या 1000 से 10,000 के बीच आ रही है.

देश के अनेक राज्यों ने अब प्राइवेट अस्पतालों में कोरोना मरीजों का नि:शुल्क इलाज बंद कर दिया है. इस कारण सक्रिय मरीजों की संख्या चिंताजनक हो चुकी है. कोरोनावायरस का इलाज 80% मामलों में तो घर पर ही बिना किसी विशेष दवा के किया जा सकता है लेकिन 20% मामलों में से गंभीर मामलों में अस्पतालों में लाखों खर्च हो रहे हैं. देश के कई अस्पतालों में मरीजों को लाखों रुपए देकर इलाज करवाना पड़ा है. ऐसे में यह सवाल पैदा हो रहा है कि जो गरीब तबका है, जिसके पास दो वक्त की रोटी भी उपलब्ध नहीं है, वह कोरोना से गंभीर रूप से पीड़ित होने की स्थिति में क्या करेगा? क्या राज्यों के पास इन गंभीर मरीजों के मुफ्त इलाज के लिए संसाधन हैं.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा है कि सरकार (Government) को कोरोना का वैक्सीन तैयार करने की दिशा में गंभीर प्रयास करने चाहिए. राहुल गांधी का यह कथन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत जैसे देश में गरीबी रेखा के नीचे गुजर-बसर करने वाले करोड़ों लोग कोरोना जैसी बीमारी का महंगा इलाज कराने में समर्थ नहीं हैं. सरकार (Government) के पास भी अधिक विकल्प उपलब्ध नहीं हैं क्योंकि आर्थिक गतिविधियों को प्रारंभ करना सरकार (Government) की मजबूरी है. ऐसे में अब कोरोना के वैक्सीन से ही उम्मीद लगाई जा सकती है.

रूस और चीन जैसे देशों ने कोरोना का वैक्सीन ईजाद तो कर लिया है लेकिन उसे इतना विश्वसनीय और प्रभावी नहीं माना जा रहा है. ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के जिस वैक्सीन की तरफ दुनिया भर की नजरें हैं उसकी उपलब्धता बाजार में अगले वर्ष के मध्य तक सुचारू होने की संभावना नहीं है. ऐसी स्थिति में कोरोना के भयानक होते संक्रमण के बीच देश के अगले 11 माह कैसे बीतेंगे यह बड़ी चिंता का विषय है. देश में कहीं भी कोरोना का संक्रमण स्थिर होने अथवा घटने का कोई संकेत नहीं है. जिस पीक के विषय में भविष्यवाणी की जा रही थी कि जून या जुलाई में पीक आ जाएगा वह दूर-दूर तक नजर नहीं आ रहा. ऐसी स्थिति में देश में कोरोना टेस्टिंग की आक्रामक रणनीति अपनाने की आवश्यकता पर विशेषज्ञ जोर दे रहे हैं.