Sunday , 18 April 2021

अपने ही कर रहे दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष को गुमराह

नई दिल्ली (New Delhi) . लगातार तीन बार विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) हारने वाली दिल्ली कांग्रेस का हाल भी अजीब है. यहां अपने ही पार्टी का बंटाधार करने में लगे हैं. प्रदेश अध्यक्ष अनिल चौधरी जहां संगठन को मजबूत करने के लिए यथासंभव प्रयास कर रहे हैं वहीं इनके इर्द-गिर्द रहने वाले कुछ नेता इनको हमेशा गलत सलाह देते रहते हैं. न तो वरिष्ठ नेताओं व पार्टी पदाधिकारियों के साथ इनके बेहतर संबंध बनने देते हैं और न मीडिया (Media) के साथ. यही वजह है कि ज्यादातर लोग पार्टी से कटते जा रहे हैं. इसका सबसे बड़ा उदाहरण तो यही है कि पार्टी की सबसे छोटी इकाई यानी ब्लॉक स्तर पर भी टीम गठित नहीं हो पा रही है. सियासी जानकार तो यह चुटकी लेने में भी पीछे नहीं हैं कि अगर यही हाल बना रहा तो कहीं ऐसा न हो जाए कि निगम चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवार भी कम पड़ जाएं.

गौरतलब है कि दिल्ली प्रदेश कांग्रेस ने हाल ही में संगठन की मजबूती के लिए 280 ब्लॉक पर्यवेक्षक नियुक्त किए थे. अब इन पर्यवेक्षकों पर ही जिम्मेदारी है नए ब्लॉक अध्यक्ष चुनने की. लेकिन, इसे विडंबना कहें या पार्टी की खस्ताहालत कि इन पर्यवेक्षकों को ब्लॉक अध्यक्ष बनाने के लिए लोग ही नहीं मिल रहे हैं. जो पुराने थे, उनमें से ज्यादातर आम आदमी पार्टी या भारतीय जनता पार्टी का हाथ थाम चुके हैं और भविष्य में भी कांग्रेस की स्थिति में सुधार नहीं होता देख नए लोगों में ब्लॉक अध्यक्ष बनने की कोई ललक नहीं रही. समस्या यह सामने आ रही है कि पार्टी की कोई भी गतिविधि करने पर सारा पैसा जेब से खर्च करना पड़ता है, जबकि पार्टी की सियासी हालत ऐसी है कि दूसरों का काम करा पाना तो दूर की बात, नेता अपने काम भी नहीं करा पाते. इसीलिए अब वह यह कहने में भी नहीं चूकते कि घर फूंककर तमाशा कौन देखे.

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