Monday , 19 April 2021

मेडीकल सीएमओ द्वारा सहायक महिला डॉक्टर से दुव्र्यवहार का मामला

जबलपुर, 01 जनवरी . नेताजी सुभाषचंद्र मेडीकल कॉलेज में नोटिस मिलने से भड़के सीएमओ डॉ.ताजदार द्वारा सहायक महिला डॉक्टर (doctor) ऋचा शर्मा से दुव्र्यवहार का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. मामले की गूंज शहर से भोपाल (Bhopal) तक पहुंच चुकी है. जहाँ डॉ. शर्मा ने आरोप लगाया कि डॉ. ताजदार द्वारा उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई वहीं डॉ.ताज द्वारा आरोप लगाया गया है कि वे मुस्लिम हैं और उन्हें डॉ. शर्मा द्वारा कथित तौर पर जातिगत शब्दों से अपमानित किया गया. ये सब कुछ अधीक्षक के सामने हुआ. सीएमओ ने मर्यादा लांघते हुए अपशब्दों की बौछार कर दी. बावजूद अधीक्षक ने सिर्फ नोटिस जारी कर मामले में लीपापोती की कोशिश की. जबकि सीएमओ पहले भी विवादों में रहे है. इससे पहले कैजुअल्टी में ड्यूटी के दौरान वह एम्बुलेंस ड्राइवर से विवाद कर चर्चा में आ चुके हैं. आरोप प्रत्यारोप के बीच अब भी अधीक्षक डॉ. राजेश तिवारी यही कह रहे हैं कि डॉ. ताज द्वारा बेहद गलत व्यवहार और अपशब्दों का प्रयोग किया गया लेकिन उनके द्वारा डॉ. शर्मा को जान से मारने की धमकी नहीं दी गई.

अधीक्षक कार्यालय की ड्यूटी से थे गैरहाजिर……………..

जानकारी के अनुसार मेडीकल कॉलेज में सीएमओ को कैजुअल्टी के साथ एक पखवाड़े या महीने में एक बार अधीक्षक कार्यालय में ड्यूटी करना होता है. सीएमओ डॉक्टर (doctor) ताजदार चौधरी को अधीक्षक कार्यालय की ड्यूटी से गैर हाजिर रहने पर अधीक्षक कार्यालय की ओर से नोटिस जारी हुआ था. नोटिस मिलने से नाराज डॉक्टर (doctor) ताजदार अधीक्षक कार्यालय पहुंचे. वहां सहायक अधीक्षक कैजुअल्टी प्रभारी डॉक्टर (doctor) ऋचा शर्मा और अधीक्षक राजेश तिवारी किसी मुद्दे पर चर्चा कर रहे थे. नोटिस लेकर पहुंचे डॉक्टर (doctor) ताजदार महिला सहायक अधीक्षक शर्मा से बहस करने लगे.

अधीक्षक के सामने हुआ पूरा विवाद…………..

अधीक्षक राजेश तिवारी के सामने ही डॉक्टर (doctor) ताजदार सीमा लांघ गए. उन्होंने डॉक्टर (doctor) रिचा शर्मा को न सिर्फ जान से मारने की धमकी दी. बल्कि अपशब्दों की मर्यादा भी तोड़ दी. महिला डॉक्टर (doctor) को उठवा लेने की धमकी दी. कहा कि नौकरी पर आंच आई तो वे कुछ भी कर सकते हैं. महिला सहायक अधीक्षक डॉक्टर (doctor) शर्मा ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है और मामले की लिखित शिकायत की है. अधीक्षक ने अधिष्ठाता कार्यालय को इसकी जानकारी दी. आज दोनों पक्षों के बयान लिए जाएंगे. इस मामले में अनुशासनात्मक कार्रवाई भी हो सकती है.

गढ़ा थाने में की शिकायत…………

इस मामले में डॉ. ताजदार चौधरी ने डॉ. ऋचा शर्मा पर कथित तौर पर षड़यंत्रपूर्वक झूठी शिकायत करने एवं मानसिक दबाव एवं जातिगत शब्दों से अपमानित करने का आरोप लगाते हुए गढ़ा थाना प्रभारी को एक शिकायत दर्ज कराई है. शिकायत में कहा गया है कि वे आकस्मिक चिकित्सा अधिकारी के पद पर एक वर्ष से पदस्थ है इसी पद पर डॉ. शर्मा भी हैं. डॉ.चौधरी का आरोप है कि डॉ. अरविंद शर्मा की पत्नीr डॉ.ऋचा शर्मा द्वारा मनचाहे तरीके से ड्यूटी लगवाई जाती है. डॉ.चौधरी का आरोप है कि विगत 6 माह से डॉ. शर्मा उन्हें जाति सूचक शब्दों से अपमानित कर रही हैं. शिकायत में डॉ.चौधरी ने सुरक्षा की मांग की है.

मामले में चुप्पी साधे हैं डीन…………..

डॉ. ताज की नियुक्ति से लेकर पूर्व में एक 108 एंबुलेंस (Ambulances) चालक के साथ कथित तौर पर की गई मारपीट के बाद गत दिवस सामने आए घटनाक्रम में जहाँ नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडीकल कॉलेज अस्पताल के अधीक्षक डॉ.राजेश तिवारी की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं वहीं डीन डॉ. प्रदीप कसार के पूरे मामले में चुप्पी साधे रहने पर भी सवाल उठ रहे हैं. सूत्रों के अनुसार इस मामले में अब तक डॉ. कसार ने सिर्फ औपचारिकताएं की हैं. डॉ. ताज की नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडीकल कॉलेज में नियुक्ति का भी तात्कालिक एचओडी डॉ. एच एस वर्मा द्वारा विरोध किया गया था लेकिन डॉ. कसार ने इसके बावजूद भी उन्हें नियुक्ति दी. एंबुलेंस (Ambulances) संचालक के साथ मारपीट के साथ कॉलेज की एक बिल्डिंग में तोड़फोड़ के आरोप भी डॉ.ताज पर लगाए गए थे.

अधीक्षक ने मांगा स्पष्टीकरण………..

सीएमओ द्वारा महिला सहायक अधीक्षक से हुए विवाद मामले में अधिष्ठाता कार्यालय को जानकारी दी है. इस संबंध में सीएमओ को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. शासकीय कार्यालय में इस तरह से सीएमओ को बात नहीं करनी थी. डॉ. चौधरी ने डॉ.शर्मा से जो व्यवहार किया अनुचित था लेकिन डॉ. शर्मा द्वारा जो जान से मारने वाला आरोप डॉ. ताज पर लगाया जा रहा है और डॉ. ताज द्वारा जो जाति सूचक अपमान का आरोप लगाया जा रहा है वह मिथ्या है.
राजेश तिवारी, अधीक्षक मेडिकल कॉलेज

अधिकारियों को लेना चाहिए एक्शन…….

मेडीकल कॉलेज में इस तरह की पहली घटना है. डॉक्टर (doctor) के पद पर होते हुए एक महिला से इस तरह बात करना ठीक नहीं था. इस संबंध में उच्चाधिकारियों को गंभीरता से विचार करना चाहिए.
अरविंद शर्मा, सहायक अधीक्षक

Please share this news