Friday , 25 June 2021

वानिकी विकास योजनाओं से सँवर रहा है मध्यप्रदेश का ग्रामीण परिवेश

खण्डवा . मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में वनों के संरक्षण और संवर्धन के लिए की जा रही प्रभावी पहल के चलते वनों के साथ-साथ उन पर आश्रित आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को वानिकी विकास के जरिए समृद्ध किया जा रहा है. मुख्यमंत्री (Chief Minister) शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में पिछले एक साल में वनों की सुरक्षा और विकास के साथ-साथ वनों पर आश्रित वनवासियों के कल्याण की नई इबारत लिखी गई है.

वन समितियों में 33 फीसदी पद महिलाओं को

वन मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने बताया कि प्रदेश में वन समितियों में 33 फीसदी महिलाओं की सदस्यता आरक्षित की गई है. साथ ही अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पद में से किसी एक पर महिला की नियुक्ति अनिवार्य की जाकर महिला सशक्तिकरण को प्रभावी बनाया गया है.

बाँस रोपण से बढ़ी किसानों की आमदनी

प्रदेश के किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए कृषि फसलों के साथ बाँस रोपण एक बेहतर विकल्प के रूप में लोकप्रिय हुआ है. प्रदेश में स्व-सहायता समूहों को ‘‘आत्म-निर्भर‘‘ बनाने के लिए मनरेगा में 83 स्व-सहायता समूह के माध्यम से 1020 हेक्टेयर क्षेत्र में बाँस रोपण किया गया. निजी क्षेत्र में मंजूर की गई 13 बाँस प्र-संस्करण इकाइयों में से 9 इकाई प्रारंभ हो चुकी है. इन इकाइयों को 1 करोड़ 68 लाख रूपये का अनुदान वितरित किया गया.

तेन्दूपत्ता संग्राहकों के बच्चों का सँवारा जा रहा भविष्य

वन मंत्री डॉ. शाह ने बताया कि इस वित्तीय वर्ष में शैक्षणिक सत्र 2019-20 के लिए अब तक करीब एक हजार छात्र-छात्राओं को 9 करोड़ 88 लाख से ज्यादा की सहायता दी गई. लघु वनोपज संघ द्वारा ‘‘एकलव्य शिक्षा विकास योजना‘‘ के जरिए तेन्दूपत्ता संग्राहकों, फड़-मुंशी और प्रबंधकों के बच्चों की शैक्षणिक गतिविधियों में सहायता प्रदान कर उनका भविष्य सँवारा जा रहा है.

32 लघु वनोपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित

प्रदेश में 32 लघु वनोपजों का समर्थन मूल्य निर्धारित किया गया है. खास बात यह है कि भारत सरकार द्वारा निर्धारित दर के समकक्ष और कुछ वनोपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य भारत सरकार की दरों से भी ज्यादा है. लघु वनोपज संग्राहकों द्वारा संग्रहीत वनोपज का प्राथमिक प्र-संस्करण एवं मूल्य संवर्धन द्वारा उचित मूल्य दिलाने के लिए यह अभिनव योजना शुरू की गई है.

वन संरक्षण

प्रदेश में वनों की अवैध कटाई को रोकने के लिए वन विभाग के अधिकारी कर्मचारियों को 3157 बन्दूक और 286 रिवाल्वर उपलब्ध कराए गए हैं. चौदह अति संवेदनशील वन मण्डलों में विशेष सशक्त बल की 3 कंपनी के जवान,वन, वन्य-प्राणी एवं वन कर्मियों की सुरक्षा करते हैं. सभी 16 वन क्षेत्रों में उड़न दस्ता दल गठित है, जो समय-समय पर स्थानीय अमले को अतिरिक्त सुरक्षा-सहायता प्रदान करता है.

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