Thursday , 13 May 2021

पिछले सप्ताह विदेशी बाजारों में भाव कमजोर होने से तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट

पिछले सप्ताह मलेशिया एक्सचेंज में आठ से 10 प्रतिशत की गिरावट आई, जिसका सीधा असर स्थानीय कारोबार पर देखने को मिला

नई ‎दिल्ली . विदेशी बाजारों में कीमतें कम होने के कारण दिल्ली तेल-तिलहन बाजार में बीते सप्ताह सरसों, मूंगफली, सोयाबीन, बिनौला तथा कच्चे पाम तेल सहित लगभग सभी तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट आई, जबकि विदेशों में सोयाबीन खल (डीओसी) की निर्यात मांग बढ़ने से सोयाबीन दाना और लूज की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई. बाजार सूत्रों ने कहा कि पिछले सप्ताह मलेशिया एक्सचेंज में आठ से 10 प्रतिशत की तथा शिकॉगो एक्सचेंज में पांच से छह प्रतिशत की गिरावट आई है, जिसका सीधा असर स्थानीय कारोबार पर देखने को मिला है.

उन्होंने कहा कि तेल-तिलहनों के भाव में आई नरमी का लाभ उपभोक्ताओं या किसानों को नहीं मिल पाया है यह गंभीर मुद्दा है. संभवत: इनके कारणों की पड़ताल की जाए तो देश में तिलहन उत्पादन नहीं बढ़ने का एक महत्वपूर्ण कारण उजागर हो सकता है.सूत्रों ने कहा कि मंडियों में विभिन्न उपायों के माध्यम से सट्टेबाजों ने किसानों को सस्ते में अपनी उपज बेचने के लिए बाध्य किया और उन्हें कोई लाभ नहीं मिल पाया. दूसरी ओर तेल-तिलहन कीमतों में गिरावट के बावजूद उपभोक्ताओं को पुराने दाम के आसपास ही खर्च करना पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि तेल कंपनियां जब ऊंचे दाम पर फुटकर विक्रेताओं को माल बेचती हैं तो मजबूरन फुटकर विक्रेताओं को भी महंगा ही बेचना पड़ता है जबकि दाम टूटने पर भाव को कम किया जाना चाहिये. सरकार को ऐसी तेल कंपनियों पर नकेल कसनी चाहिये जो विदेशों में दाम बढ़ने पर तत्काल अपनी कीमत बढ़ा देती हैं, लेकिन दाम टूटने की स्थिति में भी पुराने भाव को बनाये रखती हैं.

इसी प्रकार गुंरुवार बृहस्पतिवार को आयात शुल्क मूल्य में वृद्धि किये जाने के बाद सोयाबीन डीगम का दाम लगभग 265 रुपये क्विन्टल बढ़ने की जगह उल्टा 300 रुपये क्विन्टल टूट गया और विदेशों में मंदी का रुख कायम हो गया. सूत्रों ने कहा कि आयात शुल्क में वृद्धि करके विदेशों में सोयाबीन के तेल रहित खल की निर्यात मांग बढ़ने से सोयाबीन दाना और लूज के भाव में अपने पिछले सप्ताहांत के मुकाबले, बीते सप्ताहांत 25-25 रुपये रुपए का लाभ दर्ज हुआ और कीमतें क्रमश: 4,675-4,725 रुपए और 4,575-4,610 रुपए प्रति क्विन्टल पर बंद हुईं. इसके अलावा बाकी सभी तेल-तिलहनों के भाव हानि दर्शाते बंद हुए. सोयाबीन दिल्ली, इंदौर (Indore) और डीगम के भाव क्रमश: 700 रुपए, 550 रुपए और 800 रुपए की हानि दर्शाते समीक्षाधीन सप्ताहांत में क्रमश: 12,200 रुपए, 11,950 रुपए और 10,900 रुपए, प्रति क्विन्टल पर बंद हुए. ‎पिछले सप्ताह सरसों दाना अपने पिछले सप्ताहांत के मुकाबले 475 रुपए टूटकर 6,075-6,125 रुपए क्विन्टल और सरसों दादरी तेल 800 रुपए की भारी गिरावट के साथ 12,200 रुपए क्विन्टल पर बंद हुआ.

सरसों पक्की और कच्ची घानी तेल कीमतें भी 120-120 रुपए की हानि दर्शाती क्रमश: 1,860-2,010 रुपए और 1,990-2,105 रुपए प्रति टिन पर बंद हुईं. मूंगफली दाना सप्ताहांत में 125 रुपये रुपए टूटकर 5,460-5,525 रुपए क्विन्टल और मूंगफली गुजरात (Gujarat) तेल का भाव 300 रुपए घटकर 13,700 रुपये क्विन्टल रह गया. मूंगफली सॉल्वेंट रिफाइंड की कीमत में भी पिछले सप्ताह के मुकाबले समीक्षाधीन सप्ताहांत में 40 रुपये प्रति टिन की गिरावट आई. कच्चे पाम तेल (सीपीओ) का भाव 480 रुपए टूटकर 9,500 रुपए, रिफाइंड पामोलिन दिल्ली का भाव 600 रुपए, टूटकर 11,000 रुपए और पामोलीन कांडला (बीना जीएसटी) 550 रुपए घटकर 10,100 रुपए क्विंटल रह गया. समीक्षाधीन सप्ताहांत में बिनौला तेल भी 700 रुपए घटकर (बिना जीएसटी के) 10,300 रुपये क्विंटल रह गया. बाजार सूत्रों का कहना है कि पिछले सप्ताह मलेशिया एक्सचेंज में 8-10 प्रतिशत और शिकॉगो एक्सचेंज में 5-6 प्रतिशत की गिरावट आई लेकिन इन गिरावट का लाभ उपभोक्ताओं को नहीं मिल पाया और तेल कंपनियां ऊंचे भाव पर फुटकर विक्रेताओं को बिक्री करती रहीं.

 

Please share this news