Sunday , 25 October 2020

बांस उद्योग का ‘वोकल फॉर लोकल’ के मंत्र के साथ पूर्वोत्तर क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत अभियान को बढ़ावा: जितेन्द्र सिंह


नई दिल्ली (New Delhi) . पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), परमाणु ऊर्जा विभाग तथा अंतरिक्ष विभाग के राज्यमंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि मोदी सरकार (Government) की योजना घरेलू बांस उद्योग को बढ़ावा देने की है, जिसकी कोविड के बाद के युग में भारतीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका होगी. विश्व बांस दिवस के अवसर पर डॉ. जितेन्द्र सिंह ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास मंत्रालय (डीओएनईआर) के तहत गन्ना और बांस प्रौद्योगिकी केंद्र (सीबीडीटी) तथा भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) द्वारा आयोजित वेबिनार को संबोधित करते हुए यह बात कही. डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि कोविड-19 (Covid-19) के बाद के समय में पूर्वोत्तर क्षेत्र, भारत के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों में से एक होगा और बांस उद्योग आर्थिक गतिविधियों का एक प्रमुख स्तंभ बनने जा रहा है. उन्होंने कहा कि कई कारोबारी घराने विशाल कृषि-संसाधनों का फायदा उठाने के लिए पूर्वोत्तर क्षेत्र की ओर देख रहे हैं और हमें इस अवसर को छोड़ना नहीं चाहिए.

डॉ.जितेंद्र सिंह ने कहा कि, यह कोविड के बाद के युग में पूर्वोत्तर सहित पूरे देश की अर्थव्यवस्था को एक नया आकार देने में मदद करेगा. यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन्त्र “वोकल फॉर लोकल” पर ध्यान केंद्रित करते हुए ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को एक नई ऊर्जा प्रदान करेगा. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार (Government) ने बहुत ही संवेदनशीलता के साथ बाँस उद्योग के महत्व को स्वीकार किया है और अपना दृष्टिकोण स्पष्ट करते हुए पुराने भारतीय वन अधिनियम में संशोधन भी किया है, ताकि घरेलू बांस को वन अधिनियम के दायरे से बाहर रखा जा सके. जिसके माध्यम से लोगों की आजीविका के अवसरों को बढ़ाने में काफ़ी मदद मिलेगी. उन्होंने कच्चे बांस की वस्तुओं पर आयात शुल्क 25 प्रतिशत बढ़ाने के केंद्र सरकार (Government) के फैसले का भी स्वागत किया. उन्होंने कहा कि, इस निर्णय से घरेलू बांस उद्योगों जैसे फर्नीचर, हस्तशिल्प और अगरबत्ती बनाने में बड़े पैमाने पर मदद मिलेगी और भवन निर्माण सामग्री के लिए बांस के उपयोग को बढ़ावा भी मिलेगा.

मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि, अब राष्ट्रीय बाँस मिशन के लिए समय आ गया है, जब बाँस को एक आम आदमी की उपयोगिता की वस्तु बनाने के लिए एक बड़ी पहल की जाए और पूर्वोत्तर के इलाक़े में इस क्षेत्र की विशाल संभावनाओं को खोल दिया जाए. उन्होंने कहा, एक उपयोगी ईंधन के रूप में बांस का यह क्षेत्र नए भारत का नया इंजन बन सकता है. पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास मंत्रालय ने स्टार्ट-अप के लिए व्यवहार्यता वित्त पोषण के माध्यम से पूर्वोत्तर के युवाओं की कल्पना को थाम लिया है और यह तेजी से देश के युवाओं के लिए बेहद आकर्षक विकल्प बन रहा है.