Friday , 25 June 2021

जैन मुनि ने दीक्षार्थी के अभिनंदन समारोह में कहा; “संसार घटाने की प्रवृत्ति ही संयम है”

झाबुआ . जिले के थांदला में एक दीक्षार्थी के अभिनंदन समारोह में जैन संत संयतमुनि ने कहा “कि नेताओं, अभिनेताओं के गुणगान तो स्वार्थवश किये जाते हैं, किन्तु त्यागी आत्माओ के सम्यक गुणगान से आत्मा अपना संसार घटा लेता है. मुनि ने भावों की महत्ता का उल्लेख करते हुए कहा कि द्रव्य अभिनंदन के साथ भाव अभिनंदन आने से जीव संसार सागर से पार उतर सकता है.

मुनि ने कहा कि संयम प्रवृत्ति महा मंगलकारी है.” जैन संत संयत मुनि ने नगर के आज़ाद चौक स्थित पौषध भवन में थांदला श्रीसंघ द्वारा पेटलावद नगर के दीक्षार्थी सुहास के सम्मान में आयोजित अभिनंदन समारोह में कल एक धर्मसभा को संबोधित करते हुए उक्त उद्गार व्यक्त किये. पेटलावद के मुमुक्षु सुहास 25 अप्रेल को महावीर जन्म कल्याणक के अवसर पर रतलाम में प्रवर्तक जिनेन्द्र मुनि के सान्निध्य में भगवती जैन दीक्षा ग्रहण करेंगे. दीक्षा लेने के पूर्व स्थानीय श्रीसंघ ने आमंत्रित कर उनका बहुमान किया. दीक्षार्थी सुहास का स्थानीय जैन समाज के विभिन्न श्रीसंघों ने भाव पुष्प द्वारा सम्मान किया.

थांदला स्थानकवासी श्रीसंघ एवम आल इंडिया जेन जर्नलिस्ट एसोसिएशन द्वारा शॉल एवम अभिनंदन पत्र भेंट कर उनका सम्मान किया गया. धर्म सभा को चंद्रेशमुनिजी,साधवी द्वय, निखिलशीलाजी एवम दीप्तिश्रीजी सहित जैन श्रीसंघो केपदाधिकारियों और दीक्षार्थी के परिजनों ने संबोधित किया. जयंतमुनि एवम अमृतमुनिजी ने भी आशीर्वाद प्रदान किया. दीक्षार्थी सुहास ने संयम मार्ग अपनाने में गुरूदेव के सान्निध्य को ही मुख्य बताते हुए कहा कि “गुरूदेव के सान्निध्य से ही ज्ञात हो पाया कि संसार में हर प्रवृत्ति पापकारी है. जिसकी वजह से जीव अनादि काल से भटक रहा है.” उन्होंने कहा “मुझमे अनेक कमजोरियाँ थीं, किन्तु गुरूजनो ने मेरी कमजोरियों को ही मेरी ताकत बना दिया.”

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