Monday , 19 October 2020

भारत ने कभी भी 1959 के चीन के एकतरफ़ा तौर पर तय LAC को नहीं माना : विदेश मंत्रालय

नई दिल्ली (New Delhi) . भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि भारत ने कभी भी 1959 के चीन के एकतरफ़ा तौर पर तय वास्तविक नियंत्रण रेखा को नहीं माना. मंत्रालय के अनुसार 1993 के बाद ऐसे कई समझौते हुए जिसका मक़सद अंतिम समझौते तक सीमा पर शांति और यथास्थिति बनाए रखना था.

भारत के अनुसार 2003 तक दोनों तरफ़ से एलएसी के निर्धारण की दिशा में कोशिश होती रही लेकिन इसके बाद चीन ने इसमें दिलचस्पी दिखानी बंद कर दी लिहाज़ा ये प्रक्रिया रुक गई. अब चीन का कहना कि एक ही एलएसी है ये पिछली सहमतियों का उल्लंघन है. पिछले कुछ महीनों से चीन एकतरफ़ा तरीके से एलएसी की अलायमेंट बदलना चाहता है.

दस सितंबर को विदेश मंत्रियों की बैठक में भी चीन ने अब तक के समझौतों को मानने का भरोसा दिया था. भारत को उम्मीद है कि चीन समझौतों और सहमतियों पर कायम रहेगा और एकतरफ़ा तौर पर एलएसी बदलने की तरफ़ आगे नहीं बढ़ेगा. वहीं दूसरी ओर, भारतीय सेना कई दशकों के अपने सबसे बड़े सैन्य भंडारण अभियान के तहत पूर्वी लद्दाख में ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लगभग चार महीनों की भीषण सर्दियों के मद्देनजर टैंक, भारी हथियार, गोला-बारूद, ईंधन के साथ ही खाद्य और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में लगी हुयी है. शीर्ष कमांडरों के एक समूह के साथ थलसेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे इस विशाल अभियान में निजी तौर से जुड़े हुए हैं. इसकी शुरूआत जुलाई के मध्य में हुयी थी और अब यह पूरा होने जा रहा है.