Friday , 14 May 2021

आंदोलनरत किसानों की भावनाओं की इसी तरह अनदेखी होती रही तो सामने आएंगे गंभीर नतीजे : पवार


मुंबई (Mumbai) . राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) प्रमुख शरद पवार ने कहा है कि किसी भी संवेदनशील सरकार के लिए जरूरी है कि वह आंदोलन कर रहे किसानों की भावनाओं को समझे. उन्होंने कहा दुर्भाग्य से केंद्र सरकार (Central Government)ऐसा नहीं कर रही है. किसानों की अनदेखी के अगले दिनों में गंभीर नतीजे निकलेंगे. एक अन्य सवाल के जवाब में पवार ने कहा कि अयोध्या (Ayodhya) में राम मंदिर (Ram Temple) निर्माण के लिए कोष जुटाने के लिए जारी जन संपर्क अभियान में कई राज्यों के राज्यपालों के हिस्सा लेने की खबर है, अगर यह सच है, तो अजीब बात है.

केंद्र सरकार (Central Government)के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर किसान पिछले कई हफ्तों से प्रदर्शन कर रहे हैं. पवार ने कहा कि किसान इस ठंड में प्रदर्शन कर रहे हैं. प्रदर्शनकारी 5 किलोमीटर मार्ग पर डटे हुए हैं. वे अपनी मांगों को लेकर दृढ़ हैं. किसी भी संवेदनशील सरकार के लिए किसानों की भावनाओं को समझना जरूरी है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ तो इसके गंभीर परिणाम होंगे.

राम मंदिर (Ram Temple) निर्माण के लिए कोष जुटाने को लेकर बड़े स्तर पर चलाए जाने वाले जनसंपर्क कार्यक्रम के बारे में किए गए एक सवाल का जवाब देते हुए पवार ने कहा कि चंदा मांगना किसी भी संगठन का अधिकार है. उन्होंने कहा कि मैने सुना है कि कई राज्यों के राज्यपाल भी इसमें हिस्सा ले रहे हैं. अगर यह खबर सही हैं, तो यह अजीब बात है. पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा राज्यपाल एक महत्वपूर्ण पद होता है, यह राज्य और उसके सभी लोगों के लिए होता है.

पवार ने कहा कि वह औरंगाबाद (Aurangabad) या उस्मानाबाद जैसे शहरों के नाम बदलने के मुद्दे को गंभीरता से नहीं लेते और राज्य में महाविकास आघाडी के घटक शिवसेना, राकांपा और कांग्रेस के बीच इस पर कोई गतिरोध नहीं है. औरंगाबाद (Aurangabad) और उस्मानाबाद शहरों के नाम बदलने के मुद्दे के बारे में पूछे जाने पर पवार ने कहा कि वह इसे गंभीरता से नहीं लेते. उन्होंने कहा हमारे (गठबंधन के) बीच कोई असहमति नहीं है. आप इसे औरंगाबाद (Aurangabad), धाराशिव या कोई दूसरा नाम कह सकते हैं. मैं इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लेता. इसलिए मैं इस पर टिप्पणी नहीं करूंगा.

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