Sunday , 20 September 2020

मोदी सरकार का गरीब जनता पर डाका : रसोई गैस पर चोरी छिपे सब्सिडी बंद !

उदयपुर (Udaipur). पिछले कुछ समय से मोदी सरकार (Government) ने घरेलू उपभोक्‍ताओं को मिलने वाली राहत पर धीरे से हमला कर घरेलू गैस सिलेंडर पर मिलने वाली सब्सिडी अघोषित रूप से पूरी तरह से बंद कर दी गई है. पिछले तीन-चार महीने से घरेलू गैस सिलेंडर की मार्केट दर और सब्सिडी दर बराबर हो गई है.

जुलाई और अगस्त में दोनों रेट 601 रुपए प्रति सिलेंडर थी. ऐसे में उपभोक्ताओं से सीधे 601 रुपए वसूले गए थे. इसमें सब्सिडी की राशि जब बची ही नहीं तो, उपभोक्ता को उसके बैंक (Bank) खाते में कैसे मिलेगी? इससे पहले के महीनों में भी सब्सिडी की राशि इतनी कम थी कि, खातों में डाली ही नहीं गई.

इसकी शुरुआत छह महीने पहले से हुई जब, सिलेंडर के कैशमेमों पर सब्सिडी की राशि लिखना ही बंद कर दिया गया. यूपीए-2 (UPA-2) के समय से सब्सिडी जमा होने के निर्णय होने के बाद से, लगातार सब्सिडी मिल रही थी. उस समय सिलेंडर का आधार मूल्य 420 रुपए प्रति सिलेडंर निर्धारित किया गया था.

रियायती दर और बाजार भाव के अंतर का राशि ही, सब्सिडी के रूप में उपभोक्ताओं के खाते में आ रहीं थी. अप्रैल महीने में 160 रुपए सब्सिडी के मिले थे. उस समय सिलेंडर की मार्केट दर 747 रुपए थी और सब्सिडी वाले सिलेंडर की कीमत 587 रूपए थी. फिर लगातार कीमतें बढ़ती गईं.

पेट्रोलियम मंत्रालय ने 3 महीने में मार्केट रेट और सब्सिडी दी बराबर कर, अघोषित तौर पर इसे बंद कर दिया. सात साल में सिलेडंर की आधार कीमत में 178.5 रुपए की बढ़ोतरी की गई है.

ऐसे बंद की सब्सिडी

अप्रैल से जुलाई तक गैस सिलेंडर के दाम बढ़ाए गए. सरकार (Government) ने यह वृद्धि सिलेंडर के आधार मूल्य या सब्सिडी दर में की गई. ऐसे में सिलेंडर का आधार मूल्य व बाजार मूल्य बराबर हो गया. इसके चलते सब्सिडी बंद हो गई. पूर्व में सिलेंडर के बाजार मूल्य व आधार मूल्य में अंतर की राशि को सब्सिडी के रूप में उपभोक्ताओं के खाते में जमा करवाई जाती थी.