Friday , 25 June 2021

बढ़ती महंगाई से में गरीब का चूल्हा जले तो कैसे

भोपाल (Bhopal) . गरीब का चूल्हा जले तो कैसे इस बढ़ती महंगाई से आमजन त्रस्त हैं. रोजगार न होने से मध्यमवर्गीय और मजदूर परिवारों के लिए घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है. डीजल, पेट्रोल, रसोई गैस के साथ ही खाद्य तेल, दाल, शक्कर आदि की लगातार बढ़ती कीमतों से रसोई का बजट गड़बड़ाने लगा है. जहां खाद्य तेल 90 से 150 रुपए लीटर हो गया हैं, वहीं सरसों का तेल भी 150 रुपए के पार पहुंच गया है. शक्कर 32 से 42 रुपए प्रति किलो मिल रही है और दालें भी अब 150 रुपए किलो तक पहुंच गई हैं. गैस सिलिंडर की कीमतें भी आसमान छू रही हैं.

महंगाई के इस फेर ने महिलाओं के घर का बजट बिगाड़ दिया है. कोरोनाकाल में पहले ही व्यापार के साथ नौकरियों में मार झेलने वाले आमआमदी के लिए हर दिन का गुजारा मुश्किल होता जा रहा है. सबसे ज्यादा परेशानी निम्न वर्ग को आ रही है. पहले की तरह मजदूरी भी नहीं मिल पा रही है और रही सही कसर महंगाई पूरी कर रही है.

सब्जियों पर भी पड़ी मंहगाई की मार

राशन और ईंधन के साथ सब्जियां भी महंगाई की मार से अछूती नहीं रह पाई हैं. प्याज 30-40 रुपए किलो, करेला 40 से 50 रुपए, भिंड (Bhind)ी 40 से 50 रुपए तक पहुंच गई है. अब सब्जी ऐसी आवश्यक वस्तु है, जो हर किसी को खरीदना ही पड़ती है. ग्रामीण क्षेत्र में अब महंगाई की यह स्थिति है तो फिर शहरी क्षेत्र की स्थिति की कल्पना आसानी से की जा सकती है. आय के साधन सीमित होने से बढ़ती महंगाई से लडऩा मुश्किल होता जा रहा है.

दुकानों पर रेट लिस्ट चस्पा नहीं

शहर में किराना दुकानों पर रेट लिस्ट चस्पा न होने से ग्राहकों को सही दामों का पता नहीं चल पाता और दुकानदार मनमाफिक दामों में सामग्री बेचते हैं. जिम्मेदार महकमे ने अभी तक एक भी दुकान पर रेट लिस्ट चस्पा नहीं करवाई है. इसके फलस्वरूप ग्राहक लगातार लुट रहा हैं.

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