Tuesday , 13 April 2021

उच्च न्यायालय ने मुश्किल चुनौतियों के बीच न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए उठाए कदम


कोरोना काल में भी सजग रहा दिल्ली उच्च न्यायालय, दो मामलों में मध्यरात्रि में विशेष सुनवाई भी की

नई दिल्ली (New Delhi) . कोविड-19 (Covid-19) महामारी (Epidemic) की वजह से मार्च में देश में सभी गतिविधियां थम सी गयीं, लेकिन न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय का कामकाज जारी रहा. संक्रमित लोगों के इलाज के संबंध में और अस्पतालों में उपचार जैसी बुनियादी व्यवस्था के लिए भी अदालत को कई बार निर्देश देने पड़े. महामारी (Epidemic) की वजह से देश में गतिविधियां थमने से पहले उच्च न्यायालय ने दो मामलों में मध्यरात्रि में विशेष सुनवाई की. इसमें एक मामला उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगे से जुड़ा हुआ था. दूसरा, निर्भया सामूहिक दुष्कर्म और हत्या (Murder) का मामला था, जिसमें अदालत ने देर रात को सुनवाई की.

मार्च के बाद अदालत ने स्वास्थ्यकर्मियों, सफाई कर्मचारियों को पीपीई किट प्रदान करने, महामारी (Epidemic) के समय रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों को मेडिकल कवर, नगर निगमों के शिक्षकों, डॉक्टरों, नर्सों के बकाया वेतन समेत कई मुद्दों पर लगातार सुनवाई की. देश में 25 मार्च को लॉकडाउन (Lockdown) लगाए जाने के एक दिन बाद बिना समय गंवाए उच्च न्यायालय ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए जरूरी मामलों की सुनवाई शुरू की और केवल दोनों पक्षों के वकीलों को इस दौरान सुनवाई में शामिल होने की इजाजत दी गयी.

,,दंगा मामलों में याचिकाकर्ता ने एक न्यायाधीश (judge) के आवास पर जाकर गुहार लगायी कि हालात के कारण एक छोटे अस्पताल से पीड़ितों को सरकारी अस्पताल में लेजा पाना संभव नहीं हो रहा है. अदालत ने पुलिस (Police) को सुरक्षित मार्ग प्रदान करने और आपात इलाज सुनिश्चित करवाने का निर्देश दिया. अगले दिन, न्यायमूर्ति एस मुरलीधर ने भाजपा के तीन नेताओं के नफरत वाले कथित भाषणों के लिए उनके खिलाफ दिल्ली पुलिस (Police) द्वारा मामला दर्ज नहीं करने पर ‘रोष’ प्रकट किया. निर्भया मामलों के तीन गुनहगारों ने अपनी फांसी रोकने के लिए 16 मार्च की देर शाम अदालत का रुख किया. हालांकि, उच्च न्यायालय के साथ उच्चतम न्यायालय ने उनकी याचिकाएं खारिज कर दी और 20 मार्च की सुबह उन्हें फांसी दी गयी.

वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए सुनवाई के आरंभिक दिनों में अदालत ने कोरोना (Corona virus) संबंधी बंदिशों के कारण विदेशों में फंसे छात्रों और दूसरे नागरिकों की याचिकाओं पर सुनवाई की और प्राधिकारों को उनके लिए कदम उठाने के निर्देश दिए. जेल में भीड़ भाड़ काम करने के लिए पैरोल और अंतरिम जमानत पर कैदियों को छोड़ने के लिए उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद दिल्ली उच्च न्यायालय के एक वरिष्ठ न्यायाधीश (judge) की अध्यक्षता में एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया गया. सितंबर में उच्च न्यायालय ने कुछ वकीलों के आग्रह के कारण सीमित स्तर पर प्रत्यक्ष तरीके से सुनवाई शुरू की. हालांकि, उच्च न्यायालय के आंकड़ों के मुताबिक 90 प्रतिशत से ज्यादा वकीलों ने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए सुनवाई को तरजीह दी. उच्च न्यायालय ने फर्जी घोषणापत्र देने के कारण दिल्ली के पूर्व विधि मंत्री जितेंद्र तोमर के 2015 के चनाव को भी रद्द कर दिया.

 

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