Friday , 16 April 2021

अंतरधार्मिक विवाह पर पति पर दर्ज केस हाईकोर्ट ने किया रद्द

प्रयागराज (Prayagraj). इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में कहा है कि बालिग महिला को अपनी पसंद व शर्तों पर पति के साथ बिना किसी बाधा के जीने का अधिकार है. कोर्ट ने पति-पत्नी की सुरक्षा करने का आदेश दे कर पति के खिलाफ अपहरण के आरोप में दर्ज एफआईआर (First Information Report) रद्द कर दिया है. कोर्ट ने सीजेएम एटा व बाल कल्याण समिति के रवैये पर तीखी टिप्पणी की है और कहा कि इनके कार्य से कानूनी उपबंधों को समझने की इनकी क्षमता की कमी दिखाई दी. कोर्ट ने कहा है कि किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा 95 से स्पष्ट है कि यदि स्कूल का जन्म प्रमाणपत्र उपलब्ध है तो अन्य साक्ष्य द्वितीय माने जाएंगे. स्कूल प्रमाणपत्र में याची की जन्मतिथि 4 अक्टूबर 99 दर्ज है. इस आधार पर वह बालिग है. इसके बावजूद सीजेएम एटा ने कानूनी उपबंधों के विपरीत याची की अभिरक्षा उसके माता-पिता को सौंप दी.

कोर्ट ने कहा कि याची बालिग है. वह अपनी मर्जी से जहां चाहे जा सकती है. यह आदेश जस्टिस पंकज नकवी और जस्टिस विवेक अग्रवाल के खंडपीठ ने शिखा व अन्य की बंदीप्रत्यक्षीकरण याचिका पर दिया है. एटा की शिखा ने सलमान उर्फ करन से अंतरधार्मिक विवाह किया था. लड़की के परिवार वालों ने अपहरण के आरोप में एफआईआर (First Information Report) दर्ज कराई. पुलिस (Police) ने लड़की को कोर्ट में पेश किया. सीजेएम एटा ने पहले याची को बाल कल्याण समिति भेज दिया था. उसकी रिपोर्ट के बाद मजिस्ट्रेट ने उसके माता-पिता के सुपुर्द कर दिया. याची के पति सलमान उर्फ करन ने इस अवैध निरुद्धि से मुक्ति दिलाने के लिए यह याचिका दायर की. हाईकोर्ट ने मजिस्ट्रेट के आदेश को कानून के विपरीत करार दिया. हाईकोर्ट में पेश होकर याची ने कहा कि वह बालिग है. उसने सलमान से शादी की है और अपने पति के साथ रहना चाहती है.

Please share this news