Friday , 16 April 2021

सरकार के पास कृषि कानून बनाने से पहले किसानों से बातचीत का कोई रिकॉर्ड नहीं


नई दिल्ली (New Delhi) . कृषि कानूनों को लेकर केंद्र सरकार (Central Government)दावा करती रही है कि उसने कानून बनाने से पहले किसानों और स्टेकहोल्डर्स के साथ बातचीत की थी, मगर टीवी चैनल की ओर से दायर आरटीआई के जवाब में यह बात सामने आई है कि सरकार के पास किसानों से हुई बातचीत का कोई रिकॉर्ड नहीं है.

गौरतलब है कि नए कानून पर परामर्श नहीं लेने को लेकर ही विपक्ष और किसान संगठन की ओर से मोदी सरकार आलोचना का सामना कर रही है. उसने किसानों के साथ कई दौर की चर्चा की. कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से लेकर कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद तक कह चुके हैं कि देश के किसानों के साथ बातचीत की गई है और परामर्श लिया गया है. सोमवार (Monday) को जहां फेसबुक लाइव में नरेंद्र तोमर ने कहा कि इन कानूनों पर देश में बहुत लंबे समय से चर्चा चल रही थी. कई समितियों का गठन किया गया था, जिसके बाद देश भर में कई परामर्श आयोजित किए थे.

वहीं, रविशंकर प्रसाद ने भी कहा था कि कृषि कानूनों पर हितधारकों के साथ व्यापक परामर्श, प्रशिक्षण और आउटरीच कार्यक्रम किए गए थे. कृषि कानूनों को लेकर किसानों से बातचीत और सुझाव को लेकर एक आरटीआई दायर किया गया था, जिसमें तीनों कानूनों पर किसान समूहों के साथ सरकार की तरफ से बातचीत और परामर्श को लेकर जवाब मांगा गया था. 22 दिसंबर को मुख्य लोक सूचना अधिकारी की ओर से आए जवाब में कहा गया कि सरकार पास इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है.

गौरतलब है कि केंद्र सरकार (Central Government)के कृषि कानूनों के खिलाफ पिछले 34 दिनों से दिल्ली की सीमाओं पर आंदोलन कर रहे किसान कानून वापसी की मांग पर डटे हुए हैं. किसान और सरकार के बीच में आज एक बार फिर बातचीत होगी. आज यानी बुधवार (Wednesday) को केंद्र और आंदोलन कर रहे किसान संगठनों के बीच ठहरी हुई सातवें दौर की बातचीत होगी. हालांकि, प्रदर्शनकारी किसान संगठनों ने कहा कि चर्चा केवल तीन कृषि कानूनों को निरस्त करने के तौर-तरीकों एवं न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी देने पर ही होगी.

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