Tuesday , 2 March 2021

भूतों के भय से झारखंड के एक गांव में नहीं हो रही है धान की कटाई, खेतों में ही सड़ने के लिए छोड़ दी फसल

चतरा . अंधविश्वास का एक विचित्र मामला झारखंड में देखने में सामने आया है यहां के चतरा जिला मुख्यालय से लगभग 27 किलोमीटर दूर पितीज गांव के लोग एक अजीब से डर के साये में जिंदगी जी रहे हैं. इस गांव के लोग आज के आधुनिक युग में भी अंधविश्वास के जाल में जकड़े हुए हैं. स्थिति यह है कि डिजिटल युग में भी यहां के लोग भूत-प्रेत के डर से खेतों में लगे धान की कटाई नहीं कर रहे हैं और धान को खेतों में ही सड़ने के लिए छोड़ दिया है.
ग्रामीणों की माने तो धान की कटाई करने से गांव पर विपत्ति आ जाएगी. गांव के ग्रामीण संजय यादव ने बताया कि यहां गांवाट (पाहन) का बहुत असर है. गांव का मालिक पूजा नहीं करता है तो अनिष्ट की आशंका बनी रहती है. एक बार गांवाट (पाहन पूजारी) ने पूजा नहीं की थी, तो यहां के लोगों ने भूत के डर से खेती नहीं की. धान कटाई करने से पहले लोग गांव के मालिक से ग्राम देवता की पूजा कराते हैं.

आशंका रहती है कि अगर गांव के मालिक ने पूजा नहीं की तो धान कटाई करने से कोई बड़ी अप्रिय घटना घट सकती है. ग्रामीण खेमलाल यादव ने बताया कि अनहोनी के खौफ से यहां के लोगों ने धान खेतों में ही बर्बाद होने के लिए छोड़ दिया है. अंधविश्वास है कि गांव के मालिक की ओर से ग्राम देवता और कुल देवता की पूजा विधि-विधान से नहीं की जाती है, तब तक यहां धान की कटाई नहीं हो सकती है. ग्रामीण प्रकाश कुमार ने बताया कि गांव वालों का का मानना है कि धान की कटाई करने से इस गांव का भूत उनका कुछ ना कुछ बुरा जरूर करेगा.

दरअसल, इस गांव में जय गुरुदेव को मानने वाले और स्थानीय लोगों के बीच एकता नहीं रहने से कुल देवता और ग्राम देवता की पूजा नहीं हो पा रही है, जिसके कारण अब कुल देवता और ग्राम देवता की पूजा के बगैर यहां धान की कटाई नहीं की जा सकेगी. गांव में स्थिति यह बनी हुई है कि अगर कोई खेतों से धान काटकर अपने घर ले जाता है तो भूत भी उसके घर जाकर कुछ ना कुछ अशुभ कार्य कर देगा. क्योंकि अंधविश्वास इस कदर हावी है कि अगर धान की कटाई की जाए तो कोई विपत्ति गांव पर जरूर आ जाएगी.

ग्रामीण गांव में भूत के भय से इस कदर भयभीत है कि वे उस अंधविश्वास से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं और ना ही उन्हें इस अंधविश्वास से बाहर निकालने के लिए अब तक कोई कारगर पहल की जा रही है. चतरा में इस तरह के अंधविश्वास की बातें कोई नई बात नहीं है. इससे पहले भी जिले के कई गांवों में भूत के डर से 3 साल तक खेती नहीं हुई थी.

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