Saturday , 28 November 2020

राहुल गांधी को एक बड़े नेता के रूप में नहीं देखना चाहते


नई दिल्ली (New Delhi) . 2012 के उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) चुनावों से पहले हुई एक घटना को याद करते हुए कांग्रेस नेता एम शशिधर रेड्डी ने पार्टी के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद और उनके 23 दोस्तों में से कुछ पर हमला किया है. उन्होंने आरोप लगाया है कि वे राहुल गांधी को एक बड़े नेता के रूप में नहीं देखना चाहते हैं. रेड्डी ने कहा जब मैं 2011 में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एनडीएमए का उपाध्यक्ष था और आजाद स्वास्थ्य मंत्री थे, मैंने जापानी इंसेफेलाइटिस और एईएस के कारण पीड़ित को लेकर उनसे दो महीने तक उनसे मिलने की कोशिश की.

वहां हर साल सैकड़ों बच्चे मर रहे थे. उन्होंने कहा अंत में गोरखपुर के लगभग 500 लोगों ने खून से पत्र लिखकर प्रधान मंत्री, राष्ट्रपति, राहुल गांधी, और गुलाम नबी आजाद भेजा. सरकार (Government) को इस बीमारी के लिए एक राष्ट्रीय कार्यक्रम को मंजूरी देने के लिए राजी किया गया था. दुर्भाग्य से, इस पर बात यूपी में चुनावों से पहले या उसके दौरान बात नहीं की गई. राहुल गांधी ने इन चुनावों के दौरान जमकर प्रचार किया, लेकिन यह मुद्दा उस तरीके से उजागर नहीं हुआ, जिस तरह से हो सकता है. कांग्रेस नेता ने कहा कि समाजवादी पार्टी सपा ने इसे एक प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाया और सत्ता में आई.

उन्होंने कहा आजाद ने उस समय यूपी में इसे मुद्दा क्यों नहीं बनाया. हम सभी कह सकते हैं कि न तो आजाद और न ही उनके कुछ दोस्त राहुल गांधी को एक मजबूत नेता के रूप में उभरने देना चाहेंगे. उन्होंने 1992 में तिरुपति में प्लेनरी में के चुनाव के संबंध में एक और घटना का जिक्र किया, जिसमें एससी एसटी समुदाय का एक भी सदस्य नहीं चुना गया था. रेड्डी ने कहा तब कांग्रेस अध्यक्ष और पीएम पीवी नरसिम्हा राव ने सभी वर्गों को प्रतिनिधित्व देते हुए इस्तीफा देने के लिए निर्वाचित सीडब्ल्यूसी को चुना और पूरे सीडब्ल्यूसी को नामित किया.आपको बता दें कि हाल ही में गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस पार्टी में संगठन चुनाव कराने और इसी से अध्यक्ष चुनने की वकालत की थी. उन्होंने कहा था कि नियुक्त अध्यक्ष को एक प्रतिशत कार्यकर्ताओं का भी समर्थन प्राप्त नहीं होता है.