Thursday , 13 May 2021

सबसिडी किसानों के खातों में पहुंचे, डीजल के भाव कम हो

भोपाल (Bhopal) . मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) मं बंपर पैदावार के बावजूद किसानों को अपनी फसल का सही मूल्य नहीं मिल पाता. ऊपर से लागत बढ़ती जा रही है. ऐसे में बजट से किसानों को राहत की कई उम्मीदें हैं. वे चाहते हैं कि प्रदेश में फूड प्रोसेसिंग यूनिट खुले और मंडियां बिचौलियों से मुक्त हो. सरकार विभिन्न् सबसिडी विभाग को न देते हुए किसानों को खातों में ही पहुंचा दें. ताकि पारदर्शिता बनी रहे. डीजल के बढ़ते भाव पर लगाम लगाए, जबकि आलू-प्याज के भंडारण के लिए गोदाम बनाने हेतु किसानों को प्रोत्साहित करें. जैविक खेती को बढ़ावा दें और किसानों की आय दोगुनी करने के प्रयास करें. ऐसा ठोस माहौल बनाए, जिससे किसान एक फसल पर ही निर्भर न रहे. सरकार योजनाबद्ध तरीके से इन पर काम करें.

बजट में किसानों के लिए राहतभरे पैकेज हो.प्रदेश में फूड प्रोसेसिंग यूनिट को लेकर ठोस कार्ययोजना बने. गांव आधारित छोटी प्रोसेसिंग यूनिट खुले. ताकि किसान अपने गांवों में ही उपज का संग्रहण कर सके.जैविक खेती को बढ़ावा दिया जाए.खेती से जुड़े उपकरण सस्ती लागत पर दिए जाए. आलू-प्याज स्टोरेज के लिए गोदामों का निर्माण किया जाए. किसानों को सबसिडी मिले. मंडियों से बिचौलियों को हटाया जाए. किसानों को मिलने वाली सबसिडी उनके बैंक (Bank) खातों में ही आए. डीजल के भाव कम हो. ट्रैक्टर समेत अन्य उपकरण के रेट भी कम हो. पशुपालन के क्षेत्र में किसानों को अनुदान मिलें. खाद, बीज व दवाई से जीएसटी खत्म हो या कम हो जाए. इस बारे में ‎प्रगतिशील किसानों का कहना है ‎कि किसान फसलों का उत्पादन मुश्किल से करता है. फिर भी फसल का उचित मूल्य नहीं मिल पाता है. सरकार को चाहिए कि वह कृषि यंत्रों के साथ खाद, बीज व दवाई की कीमतों में किसानों को राहत दें. डीजल के भाव भी कम हो. वर्तमान में अधिकतर किसान ट्रैक्टरों के माध्यम से भी कृषि कार्य करते हैं. प्रदेश में रबी-खरीफ फसलों के साथ उद्यानिकी की संतरा, आलू व प्याज फसलों की भी बड़े हिस्से में पैदावार ली जाती है, लेकिन इन्हें सहेजने के लिए न तो उतनी संख्या में स्टोरेज है और न ही फूड प्रोसेसिंग यूनिट. सरकार इन दोनों पर काम करें. बजट में इन्हें लेकर प्रविधान करें. बजट से उम्मीद है कि किसानों को राहतभरा पैकेज दिया जाए. वर्तमान में खाद-बीज, दवा समेत डीजल आदि की कीमतें अधिक है. इस कारण फसल की लागत बढ़ जाती है, जबकि उसका मूल्य सही नहीं मिल पाता है. इसलि सरकार लागत पर लाभकारी मूल्य दें. बजट से यही उम्मीद है. साथ ही मंडियों में हावी बिचौलियों पर नियंत्रण करें. इससे किसानों की आर्थिक स्थिति सुधरेगी.

वहीं सेवानिवृत्त संचालक कृषि डॉ. जीएस कौशल का कहना है ‎कि किसान की आय बढ़ाने के लिए सरकार को और सार्थक प्रयास करने होंगे. वर्तमान में पैदावार में जितना खर्च होता है, उसके मुताबिक किसान की आय नहीं हो पाती है. इसलिए सरकार बजट में प्रविधान करें. उन्हें विभिन्न् सबसिडी का फायदा दें और उपकरण उपलब्ध कराएं. प्रदेश में गांव आधारित छोटी फूड प्रोसेसिंग यूनिट खोली जाए. ताकि किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके. जैविक खेती को बढ़ावा मिलें और मंडियों से बिचौलियों को हटाया जाए. भारतीय किसान यूनियन प्रदेशाध्यक्ष अनिल यादव का कहना है ‎कि सरकार ऐसी व्यवस्था बनाए, जिसमें किसानों को मिलने वाली विभिन्न् सबसिडी सीधे उनके बैंक (Bank) खाते में ही पहुंच जाए. डीजल के भाव को नियंत्रित करें. वर्तमान में डीजल काफी महंगा हो गया है. इससे खेती की लागत बढ़ रही है. ट्रैक्टर समेत अन्य कृषि उपकरण पर किसानों को राहत दी जाए.

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