Friday , 7 May 2021

ट्वीटर बाबा, गोबर वाले दाऊ और दारू वाले दादा… छत्तीसगढ़ में नई राजनीतिक चिन्हारी

रायपुर (Raipur). वक्त के साथ बहुत कुछ बदल जाता है. राजनीति में यह समय चक्र परिवर्तन कुछ ज्यादा ही असर दिखाता है. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) में सियासी उपमाएं भी बदल रही हैं. इनमें बदलाव पहले भी ही रहा था. अब भी हो रहा है. फर्क बोलने और महसूस करने में है. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) की चार चिन्हारी नरवा, गरुवा, घुरबा, बाड़ी के साथ राज्य में नए राजनीतिक युग का पदार्पण हुआ. दो साल में इन चिन्हारियों के अलावा कुछ नई चिन्हारी सियासी आबोहवा में गूंजती रही हैं और अब इनमें ऐसा बदलाव नजर आ रहा है जो यह सोचने पर मजबूर कर रहा कि ये कहां आ गए हम, यूं ही राजनीति करते..!

जब डॉ. रमन सिंह ने अपने मुख्यमंत्रित्व काल में गरीबों को एक रुपए किलो चावल वाली योजना लांच की थी तो उन्हें चाउर वाले बाबा के रूप में नई पहचान मिली. देखते ही देखते वे बोनस वाले बाबा बने तो कांग्रेस के लोगों की नजर में दारू वाले बाबा भी. कांग्रेस के लोग अक्सर कहा करते थे कि रमन राज में दारू है, जितनी चाहे पी! अब कांग्रेस राज में गंगा जल नहीं, दारू बह रही है तो यह अलग बात है! इस समय डॉ. रमन अक्सर ट्वीट करके भूपेश बघेल सरकार पर निशाना साध रहे हैं तो वे कांग्रेस को ट्वीटर वाले बाबा जान पड़ रहे हैं. कांग्रेसी उन्हें ट्वीटर राजनेता बता रहे हैं.

डॉ रमन के ट्वीट के जवाब में कांग्रेस की ओर से जो प्रतिक्रियाएं आ रही है, उनमें उन्हें मैदानी राजनीति से दूर बताया जा रहा है. इधर मुख्यमंत्री (Chief Minister) बघेल गोबर खरीदी योजना पर जिस तरह आत्म मुग्ध हैं, उसे देखते हुए वे भाजपा के लोगों को गोबर वाले दाऊ जी महसूस होने लगें तो कोई अचंभा नहीं होना चाहिए. राज्य में सरकारी दारू दुकानों की लीलाएं जिस तरह सामने आ रही हैं, उनके मद्देनजर भाजपा के लोगों को यदि आबकारी मंत्री कवासी लखमा दारू वाले दादा दिखने लगें तो भी कोई आश्चर्य नहीं होगा. आखिर भाजपा राज में दारू की खपत बढऩे और राजस्व वृद्धि के आंकड़ों का हवाला देते हुए कांग्रेस के लोग डॉ. रमन को दारू वाले बाबा की संज्ञा देते ही थे तो भाजपा क्यों परहेज करेगी? इधर वैसे भी दारू के मामले में भाजपा आए दिन कांग्रेस की सरकार को कोसती रहती है.

पूछती है कि गंगा जल की सौगंध कहां गई? जब बिहार (Bihar) के चुनाव में कांग्रेस के घोषणा पत्र में दारू बंदी की समीक्षा का जिक्र आया था तब भी भाजपा की ओर से डॉ. रमन ने सवाल उठाया था कि यहां गंगा जल हाथ में लेकर दारू बंदी की सौगंध लेने वाले कांग्रेसी बिहार (Bihar) में दारू का लालच दे रहे हैं. यहां क्या वादा निभाएंगे. रमन सिंह सरकार जिस तरह शराब बेच रही थी, वैसे ही भूपेश बघेल सरकार भी बेच रही है. अंतर सिर्फ इतना है कि कांग्रेस ने दारू बंद करने का संकल्प लिया था! शराब चीज ही ऐसी है कि सारे संकल्प टूट जाते हैं! यहां तो सरकारी दारू दुकानों के गोरखधंधे भी चर्चा में आते रहते हैं तो भाजपा इस मामले में भी आक्रामक है. फिर कवासी लखमा की बातें भाजपा को खटक रही हैं तो वह कुछ न कुछ तो रंग दिखाएगी ही. बहरहाल छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) की नई राजनीतिक चिन्हारियां गढऩे का दौर बदस्तूर जारी है.

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