Monday , 14 June 2021

पेड़ों को बचाने के लिए 48 साल बाद उत्‍तराखंड में फिर उठा ‘चिपको’ आंदोलन

बागेश्वर . उत्‍तराखंड के बागेश्वर जिले के जाखनी गांव में एक बार फिर से चिपको आंदोलन शुरू हो गया है. यहां कमेड़ीदेवी-रंगधरा-मजगांव-चौनाला मोटर मार्ग के लिए कट रहे पेड़ों को बचाने के लिए लोग पेड़ों में लिपट रहे हैं. महिलाओं के पेड़ों में लिपटने से फिर 1973 के चिपको आंदोलन की याद आ गई है. उस समय गौरा देवी के नेतृत्व में चलाया गया था. ग्राम प्रधान ईश्वर सिंह मेहता का कहना है कि गांव में 600 की आबादी है. 8 किलोमीटर क्षेत्रफल में फैले जंगल में बांज, बुरांश और उतीस के 10 हजार से अधिक पेड़ हैं. इसमें 90 फीसदी तो बांज के पेड़ हैं, जिन्हें ग्रामीणों ने अपने बच्चों की तरह पाला है. जो सर्वे सड़क के लिए हुआ है वह पूरी तरह से जंगल मार्ग से हुआ है, जिससे वन का अधिकांश हिस्‍सा समाप्त हो जाएगा.

हिमानी मेहता का कहना है कि जिस तरह से हम बच्चे बड़े होते रहे वैसे ही हमारे परिजनों ने पेड़ों को भी पाला है. लेकिन, प्रशासन द्वारा सड़क बनाने के नाम पर पेड़ों को काटा जा रहा है, जिन्हें हम किसी भी हालात में कटने नहीं देंगे. पहले हमें काटेंगे इसके बाद ही पेड़ों को काटेंगे. इस मुहिम का हिस्‍सा बनीं एक अन्‍य महिला हेमा देवी का कहना है कि हम लोगों ने पानी की परेशानी को देखते हुए जंगल बनाया है जिसे आग से बचाया है. यहां तक कि गांव के लोग पेड़ों को लकड़ी जलाने के लिए भी नहीं काटते हैं, तो फिर सड़क के नाम पर हजारों पेड़ों को क्यों काटने दें? हम पेड़ों पर लिपटे हैं, जब विभाग हमें काटेगा तब पेड़ों पर आरी चलाने देंगे. चिपको आंदोलन पर्यावरण रक्षा का आंदोलन था. आंदोलन चमोली जिले में 1973 में शुरु हुआ था. यह एक दशक के अंदर पूरे राज्य में फैल गया था. इस आंदोलन का नेतृत्व रैणी गांव की गौरा देवी ने किया था. जो पेड़ों को बचाने के लिए पेड़ों से चिपक गई थीं.

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