Tuesday , 22 September 2020

खुली मिठाइयों को मैन्यूफैक्चरिंग एवं बेस्ट बिफोर डेट से मिले मुक्ति: कारोबारी


– ‎मिठाई कारोबा‎रियों ने कहा, खुली बिकने वाली मिठाइयों में ऐसा करना कठिन, इसलिए आदेश में संशोधन किया जाए

नई दिल्ली (New Delhi) . भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) ने लोगों की सेहत को ध्यान में रख कर खाद्य पदार्थों पर मैन्यूफैक्चरिंग और बेस्ट ‎बिफोर डेट अंकित करने को कहा है, लेकिन इस आदेश में कारोबारियों ने संशोधन की मांग की है. इनका कहना है कि डिब्बा बंद मिठाइयों में तो ऐसा करना संभव है, लेकिन मिठाई की छोटी दुकानों में खुली (लूज) बिकने वाली मिठाइयों में ऐसा करना जरा कठिन है. इसलिए आदेश में संशोधन किया जाए.

छोटे कारोबारियों के संगठन फेडरेशन ऑफ़ आल इंडिया व्यापार मंडल (फैम) का कहना है कि एफएसएसएआई ने 24 फरवरी 2020 को जारी आदेश में सभी डब्बा बंद मिठाई के साथ साथ खुली बिकने वाली मिठाइयों पर भी मैन्यूफैक्चरिंग डेट और बेस्ट बीफोर डेट छापने को कहा है. पहले यह आदेश एक जून 2020 से लागु होना था परन्तु कोरोना महामारी (Epidemic) के चलते यह कानून अब यह एक अक्टूबर 2020 से लागू होना है. इस आदेश को लागू करने में छोटे हलवाई असमर्थ हैं. देश में हजारों ऐसे हलवाई हैं, जो शाम में जलेबी या किसी अन्य मिठाई की दुकान सजाते हैं और कुछ घंटे में ही बेच कर छुट्टी. ऐसे हलवाई कैसे इन सब प्रावधानों को लागू कर पाएंगे?

संगठन का कहना है कि इसी तरह मिठाई की छोटी-छोटी दुकानों में आज बनी मिठाई आज ही बिक जाती है या कल तो निश्चित रूप से बिक ही जाती है. मिठाई आमतौर पर खरीदने के तुरंत बाद बहुत कम अवधि में में ही उपभोग में लाई जाती है. भारत जैसे गरीब राष्ट्र में अभी भी पैक्ड मिठाई और चॉकलेट सामान्य लोगों की पहुंच से बाहर हैं. फैम ने अपने पत्र में लिखा है कि 60 से 70 फीसदी जनसंख्या ग्रामीण और अर्द्ध शहरी क्षेत्रों में रहती है. वहां मिठाई की छोटी दुकानों का ही चलन है. इसलिए वहां इस तरह का आदेश लागू करना व्यवहारिक नहीं है.

फैम ने नियम 2011 हवाला देते हुआ लिखा है कि कानून की मंशा सभी प्रकार के पहले से ही पैक खाद्य सामग्री के पैक पर विनिर्माण की तारीख (डेट ऑफ़ मैन्युफैक्चरिंग) एवं इस तारीख से पहले उपयोग करें (बेस्ट बिफोर डेट) अंकित करना अनिवार्य है. परन्तु यह प्रावधान वहां पर लागू नहीं होता जहा किसी भी खाद्य प्रदार्थ का जीवन सात दिनों से कम है. मिठाई जैसी वस्तु स्वाभाविक रूप से सात दिनों से पहले ही उपभोग की जाती है. अतः 2011 के नियम एवं बीते 24 फरवरी के आदेशों में विरोधाभास है.