Friday , 7 May 2021

दोनों कोरोना वैक्सीन सुरक्षित देशवासी प्रोपेगेंडा और अफवाहों से रहें सावधान


नई दिल्ली (New Delhi) . प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने देश में दो-दो वैक्सीन के साथ कोरोना टीकाकरण अभियान की शरुआत की है. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उन्होंने इस महाअभियान का आगाज किया और राष्ट्र को संबोधित किया. प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत ने कम समय में दो-दो वैक्सीन का निर्माण किया है. यह बड़ी उपलब्धि है. उन्होंने देशवासियों को किसी भी तरह के अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की है. पूरे देश को बेसब्री से इंतेजार रहा है. कितने महीनों से देश के हर घर में बच्चे, बूढ़े, जवान सभी की जुबान पर ये सवाल था कि कोरोना वैक्सीन कब आएगी. अब वैक्सीन आ गयी है, बहुत कम समय में आ गई है.

अब से कुछ ही मिनट बाद भारत में दुनिया का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान शुरू होने जा रहा है. मैं सभी देशवासियों को इसके लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं. भारत का टीकाकरण अभियान बहुत ही मानवीय और महत्वपूर्ण सिद्धांतों पर आधारित है. जिसे सबसे ज्यादा जरूरत है, उसे सबसे पहले कोरोना का टीका लगेगा. मैं ये बात फिर याद दिलाना चाहता हूं कि कोरोना वैक्सीन की दो डोज लगनी बहुत जरूरी है. पहली और दूसरी डोज के बीच, लगभग एक महीने का अंतराल भी रखा जाएगा. दूसरी डोज़ लगने के 2 हफ्ते बाद ही आपके शरीर में कोरोना के विरुद्ध ज़रूरी शक्ति विकसित हो पाएगी.

इतिहास में इतने बड़े स्तर का टीकाकरण अभियान पहले कभी नहीं चलाया गया है. दुनिया के 100 से भी ज्यादा ऐसे देश हैं जिनकी जनसंख्या 3 करोड़ से कम है. और भारत वैक्सीनेशन के अपने पहले चरण में ही 3 करोड़ लोगों का टीकाकरण कर रहा है. दूसरे चरण में हमें इसको 30 करोड़ की संख्या तक ले जाना है. जो बुजुर्ग हैं, जो गंभीर बीमारी से ग्रस्त हैं, उन्हें इस चरण में टीका लगेगा. आप कल्पना कर सकते हैं, 30 करोड़ की आबादी से ऊपर के दुनिया के सिर्फ तीन ही देश हैं- खुद भारत, चीन और अमेरिका. हमारे वैज्ञानिक और विशेषज्ञ जब दोनों मेड इन इंडिया वैक्सीन की सुरक्षा और प्रभाव को लेकर आश्वस्त हुए, तभी उन्होंने इसके इमरजेंसी (Emergency) उपयोग की अनुमति दी. इसलिए देशवासियों को किसी भी तरह के प्रोपेगेंडा, अफवाहें और दुष्प्रचार से बचकर रहना है. भारत के वैक्सीन वैज्ञानिक, हमारा मेडिकल सिस्टम, भारत की प्रक्रिया की पूरे विश्व में बहुत विश्वसनीयता है.

हमने ये विश्वास अपने ट्रैक रिकॉर्ड से हासिल किया है. कोरोना से हमारी लड़ाई आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की रही है. इस मुश्किल लड़ाई से लड़ने के लिए हम अपने आत्मविश्वास को कमजोर नहीं पड़ने देंगे, ये प्रण हर भारतीय में दिखा. हर हिंदुस्तानी इस बात का गर्व करेगा की दुनिया भर के करीब 60% बच्चों को जो जीवन रक्षक टीके लगते हैं, वो भारत में ही बनते हैं. भारत की सख्त वैज्ञानिक प्रक्रियाओं से होकर ही गुजरते हैं. भारतीय वैक्सीन विदेशी वैक्सीन की तुलना में बहुत सस्ती हैं और इनका उपयोग भी उतना ही आसान है. विदेश में तो कुछ वैक्सीन ऐसी हैं जिसकी एक डोज 5,000 हजार रुपये तक में हैं और जिसे -70 डिग्री तापमान में फ्रीज में रखना होता है. भारत की वैक्सीन ऐसी तकनीक पर बनाई गई है जो भारत में ट्राइड और टेस्टेड है.

ये वैक्सीन स्टोरेज से लेकर ट्रांसपोटेशन तक भारतीय स्थितियों और परिस्थितियों के अनुकूल हैं. यही वैक्सीन भारत को कोरोना के खिलाफ लड़ाई में निर्णायक जीत दिलाएगी. 7. संकट कितना भी बड़ा क्यों न हो, देश वासियों ने कभी आत्मविश्वास खोया नहीं. जब भारत में कोरेाना पहुंचा तब देश में कोरोना टेस्टिंग की एक ही लैब थी, हमने अपने सामर्थ्य पर विश्वास रखा और आज 2,300 से ज्यादा नेटवर्क हमारे पास है. हम दूसरों के काम आएं, ये निश्वार्थ भाव हमारे भीतर रहना चाहिए. राष्ट्र सिर्फ मिट्टी, पानी, कंकड़, पत्थर से नहीं बनता. बल्कि राष्ट्र का मतलब होता है हमारे लोग.

भारत ने 24 घंटे सतर्क रहते हुए, हर घटनाक्रम पर नजर रखते हुए, सही समय पर सही फैसले लिए. 30 जनवरी को भारत में कोरोना का पहला मामला मिला, लेकिन इसके दो सप्ताह से भी पहले भारत एक हाई लेवल कमेटी बना चुका था. 17 जनवरी, 2020 वो तारीख थी, जब भारत ने अपनी पहली एडवायजरी जारी कर दी थी. भारत दुनिया के उन पहले देशों में से था जिसने अपने एयरपोर्ट्स पर यात्रियों (Passengers) की स्क्रीनिंग शुरू कर दी थी. कोरोना संक्रमण के बाद चीन ने अपने नागरिकों को छोड़ दिया था हम अपने नागरिकों को लेकर आएं.

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