Friday , 26 February 2021

अप्रैल-सितंबर में कृषि व्यापार संतुलन 9002 करोड़ रु के साथ सकारात्मक रहा

नई दिल्ली (New Delhi) . कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए सरकार (Government) द्वारा किए गए लगातार और ठोस प्रयासों का लाभ मिल रहा है. कोविड-19 (Covid-19) संकट के बावजूद अप्रैल-सितंबर 2020 की कुल अवधि के दौरान आवश्यक कृषि वस्तुओं के निर्यात में 43.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई है. अप्रैल-सितंबर 2020 में 53626.6 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ जबकि पिछले साल इसी अवधि के दौरान 37397.3 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ था. अप्रैल-सितंबर 2019-20 के मुक़ाबले अप्रैल-सितंबर 2020-21 के दौरान सकारात्मक वृद्धि दर्ज करने वाले प्रमुख जिंस समूहों में मूंगफली का (35%), परिष्कृत चीनी (104%), गेहूं (206%), बासमती चावल (13%) और गैर-बासमती चावल का (105%) निर्यात किया है. इसके अलावा, अप्रैल-सितंबर 2020 के दौरान व्यापार संतुलन 9002 करोड़ रुपये के साथ सकारात्मक रहा है जबकि 2019 की समान अवधि के दौरान व्यापार घाटा 2133 करोड़ रुपये रहा था. महीने से महीने (एमओएम) आकलन के आधार पर मिले ब्यौरे के अनुसार सितंबर 2020 के दौरान आवश्यक कृषि जिंसों का भारत का कृषि निर्यात, सितंबर 2019 में हुए 5114 करोड़ रुपये के निर्यात के मुकाबले 9296 करोड़ रुपये का रहा है, यानी कि इसमें 81.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए केन्द्र सरकार (Government) ने कृषि निर्यात नीति 2018 की घोषणा की थी, जिसमें अंतरराज्यीय नकदी फसलों जैसे फलों, सब्जियों और मसालों का निर्यात केंद्रित खेती के लिए समूह आधारित दृष्टिकोण रखा जाता है. इस प्रकार से देश भर में विशिष्ट कृषि उत्पादों के लिए ख़ास समूहों की पहचान की जाती है और फिर इन समूहों में निर्यात केंद्रित कृषि को प्रोत्साहन देने के लिए उपाय किए जाते हैं. कृषि तथा बागवानी उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण-एपीईडीए की देख-रेख में आठ निर्यात संवर्धन मंच-ईपीएफ स्थापित किए हैं. ये ईपीएफ केला, अंगूर, आम, अनार, प्याज, डेयरी, बासमती चावल और गैर-बासमती चावल के लिए बनाए जाते हैं. ये मंच निर्यात के लिए संपूर्ण उत्पादन/आपूर्ति श्रृंखला में हितधारकों की पहचान करने, दस्तावेज़ों की जांच करने और उनके हित तक पहुंचने के लिए कड़े प्रयास कर रहे हैं. जिससे कि, विभिन्न प्रयासों के माध्यम से वैश्विक बाजार में इन निर्यातों को अधिक से अधिक बढ़ाया जा सके.

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