Thursday , 25 February 2021

गजेन्द्र सिंह शक्तावत के निधन के बाद उपचुनाव में सरकार की होगी अग्नि परीक्षा


अजमेर . राजस्थान (Rajasthan)में विधायक गजेन्द्र शक्तावत के निधन के बाद गहलोत सरकार के सामने समस्या उत्पन्न हो गई है. कयास लगाये जा रहे है कि आगामी उपचुनाव गहलोत सरकार के लिए अग्नि परीक्षा साबित हो सकते हैं, क्योंकि विधानसभा में कांग्रेस का संख्या बल कम हो गया है.

आपको बता दें कि, प्रदेश में फरवरी से ही बजट सत्र संभावित है जो मार्च के अंत तक चलेगा. नियमानुसार विधायक के निधन के छह महीने में ही खाली सीट पर उपचुनाव करवाकर परिणाम जारी करने होते हैं. परिणाम जारी होने के 14 दिनों में विधायक को शपथ दिलवानी जरूरी है. विधायक कैलाश त्रिवेदी का 6 अक्टूबर को निधन हो गया था. इस हिसाब से मार्च से मार्च तक चुनाव पूरे होकर परिणाम भी जारी करना होगा. इस समय सरकार बजट सत्र में रहेगी. ऐसे में संभावना यही है कि ये उपचुनाव फरवरी में ही संपन्न होंगे. लेकिन उपचुनावों के नतीजे सरकार की कड़ी परीक्षा भी लेंगे.

यदि नतीजे पक्ष में रहे तो सदन में सरकार मजबूती से बजट रखेगी नहीं तो विपक्ष को हमलावर होने का मौका मिलेगा. कांग्रेस के लिए यह स्थिति ठीक नहीं होगी क्योंकि मंत्रिमंडल फेरबदल और राजनीतिक नियुक्तियों में हो रही देरी से पहले ही पार्टी में असंतोष पनप रहा है. विधानसभा की दलीय स्थिति की बात करें तो अभी कांग्रेस के 104, भाजपा के 71, आरएलपी के 3, निर्दलीय के 13, सीपीएम के 2, बीटीपी के 2 और आरएलडी के 1 विधायक शामिल हैं. इस हिसाब से अब सदन में 196 सदस्य ही रह गए गए हैं, वहीं कांग्रेस के 3, भाजपा के एक एमएलए की मौत हो गई है.

वहीं, राज्य के नए विधानसभा भवन के साथ एक मिथक भी जुड़ा हुआ है. नए विधानसभा भवन में एक कार्यकाल में 200 विधायक एक साथ नहीं बैठ पाए. आपको बता दें कि, साल 2000 में विधानसभा भवन का निर्माण श्मशान भूमि पर हुआ और 2001 में इसमें विधायक इसमें शिफ्ट कर दिए गए. तभी से यह मिथक इसके साथ जुड़ गया है. पूर्व विधायक ज्ञानदेव आहूजा ने भी विधानसभा में इस मुद्दे को उठाते हुए सदन को गंगाजल से धोने की मांग भी कर दी थी. यहां तक की इस भवन में पूजा-हवन करवाने की मांग भी उठती रही.

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