Monday , 19 October 2020

महाराणा जगत सिंह द्वितीय की 311वीं जयंती

उदयपुर (Udaipur). मेवाड़ के 62 वें एकलिंग दीवान महाराणा जगत सिंह द्वितीय (शा. 1734-1751 ई.) पिता महाराणा संग्राम सिंह द्वितीय के निधन के बाद 11 जनवरी 1734 ई. को मेवाड़ की गद्दी पर बैठे. इन महाराणा का जन्म आश्विन कृष्ण दशमी विक्रम संवत 1766 को हुआ था.

महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउण्डेशन, उदयपुर (Udaipur) के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी श्री भूपेन्द्र सिंह आउवा ने इस अवसर पर बताया कि महाराणा जगत सिंह द्वितीय को अपने शासन के आरम्भ से ही मराठा आक्रमण का सामना करना पड़ा था अतः राजपूत राज्यों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर शासकों को संगठित करने में महाराणा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. महाराणा जगत सिंह द्वितीय की अध्यक्षता में राजपूत राज्यों के शासकों का एक सम्मेलन 17 जुलाई 1734 ई. को हुरड़ा (भीलवाड़ा) में आयोजित किया गया था. इस सम्मेलन में जयपुर (jaipur), जोधपुर, कोटा, बीकानेर, किशनगढ़ और नागौर के शासकों ने भाग लिया था.

महाराणा जगत सिंह द्वितीय के शासनकाल में विक्रम संवत् 1798 में श्रीनाथजी मंदिर के तिलकायत महाराज श्री गोवर्धनेश जी के मार्गदर्शन में वैष्णव सम्मेलन व मेवाड़ में प्रथम सात स्वरूप (7 निधी स्वरूप) के उत्सव का आयोजन नाथद्वारा में हुआ था. इसमें विभिन्न राजपूत राज्यों के शासकों ने भाग लिया था. महाराणा जगत सिंह द्वितीय के शासनकाल के दौरान कृष्णचरित्र और रासलीला पांडुलिपियों का चित्रण किया गया था. महाराणा के द्वारा चित्रों पर कलाकारों के नाम, दिनांक और उनके विषयों का उल्लेख करवाया जाने लगा, इस काल के प्रमुख मेवाड़ी चित्रकार जयराम, जीवा, फरसा, जुगारसी व बख्ता थे. महाराणा ने मेवाड़ में नृत्य (कत्थक), संगीत को प्रोत्साहन दिया था. महाराणा के संरक्षण में कवि नंदराम ने ‘जगविलास‘ की रचना की.

महाराणा जगत सिंह द्वितीय ने 4 मई 1743 ई. को पिछोला झील में स्थित द्वीप पर सफेद संगमरमर से जगनिवास (ताज लेक पैलेस) का निर्माण प्रारम्भ करवाया, जिसमें खुश महल, बड़ा महल, फूल महल और ढोला महल बनवाये. इसके अतिरिक्त उदयपुर (Udaipur) के राजमहल में पीतम निवास, रस निवास एवं वाराणसी में राणा महल का निर्माण करवाया.