Saturday , 6 March 2021

यूएन में बोला भारत, कट्टरपंथियों ने ध्वस्त कर दिया ह‍िंदू मंदिर मूकदर्शक बनी रही पाकिस्‍तान सरकार

न्यूयार्क . पाकिस्‍तान में हिंदू अल्पसंख्यकों के साथ अमानवीयता और भेदभाव की खबरें कोई नई बात है लेकिन अब यहां कट्टरपंथियों के हौंसले इतने बुलंद है कि वे यहां हिंदुओं के धार्मिक स्थलों को क्षति पहुंचाने से भी बाज नहीं आ रहे हैं. यहां एर हिंदू मंदिर को एक मौलवी की अगुवाई में कट्टरपंथियों द्वारा ध्वस्त करने के मुद्दे को भारत ने संयुक्‍त राष्‍ट्र में पुरजोर तरीके से उठाया है. भारत ने कहा कि दुनिया में आतंकवाद, हिंसात्‍मक अतिवाद, कट्टरपंथ और असहिष्‍णुता बढ़ रही है. इससे धार्मिक और सांस्‍कृतिक विरासत स्‍थलों को आतंकी गतिविधियों और विनाश का खतरा उत्‍पन्‍न हो गया है. भारत ने कहा कि इसका ताजा उदाहरण हाल ही में पाकिस्‍तान में देखने को मिला जहां पर एक ऐतिहासिक हिंदू मंदिर को तोड़ दिया गया और इमरान खान सरकार मूकदर्शक बनी रही. पाकिस्‍तान अक्‍सर मुसलामानों को लेकर संयुक्‍त राष्‍ट्र में भारत को घेरने की कोशिश करता रहता है लेकिन अब भारत ने उसे सिखों और हिंदुओं पर जारी अत्‍याचार की लिस्‍ट गिना दी. भारत ने कहा, ‘अफगानिस्‍तान में कट्टरपंथियों द्वारा भगवान बुद्ध की मूर्तियां तोड़े जाने की याद आज भी हमारे जेहन में बनी हुई है.

आतंकियों ने अफगानिस्‍तान में सिखों के गुरुद्वारे पर कायराना हमला किया जिसमें 25 श्रद्धालु मारे गए. यह इस खतरे का एक और उदाहरण है. हाल ही में पिछले महीने ही पाकिस्‍तान के करक में ए‍क‍ हिंदू मंदिर को भीड़ ने आग लगा दी जो वहां के प्रशासन के स्‍पष्‍ट समर्थन से किया गया. जब मंद‍िर को गिराया जा रहा था, उस समय वहां का प्रशासन मूकदर्शक बनकर खड़ा हुआ था.’
भारत ने संयुक्‍त राष्‍ट्र से कहा कि उसे और यूएन अलायंस ऑफ सिव‍िलाइजेशन को जब तक चयनात्‍मकता बची हुई है, किसी का पक्ष नहीं लेना चाहिए. भारत ने कहा कि हमें उन ताकतों के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा होना होगा जो कपटपूर्वक संवाद को हटाती हैं और शांति की जगह घृणा और हिंसा भरती हैं. बता दें कि पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक कट्टरपंथी इस्लामिक पार्टी के सदस्यों के नेतृत्व में भीड़ ने एक हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ की थी और उसमें आग लगा दिया था.

इस मंदिर में एक हिंदू धार्मिक नेता की समाधि थी. मंदिर की दशकों पुरानी इमारत के जीर्णोद्धार के लिए हिंदू समुदाय ने स्थानीय अधिकारियों से अनुमति ली थी. कुछ स्थानीय मौलवियों और जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम पार्टी (फजल उर रहमान समूह) के समर्थकों की अगुवाई में भीड़ ने पुराने ढांचे के साथ-साथ नए निर्माण कार्य को ध्वस्त कर दिया. मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के नेताओं ने मंदिर पर हमले की कड़ी निंदा की थी. इसके बाद पाकिस्‍तान के सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) सख्‍त रुख अपनाया और मंदिर को फ‍िर से बनाने का आदेश दिया था. भारत ने भी मंदिर में तोड़फोड़ की घटना को लेकर पाकिस्तान के समक्ष विरोध दर्ज कराया था और इस घटना के दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने की मांग की थी. राजनयिक माध्यम से पाकिस्तान के समक्ष विरोध दर्ज कराया गया था. पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ की घटना को लेकर भारत के विरोध को ‘पूरी तरह से अनुचित’ करार दिया था.

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