Tuesday , 1 December 2020

भारत की प्राचीन निर्माण पद्धति से किया जा रहा राम मंदिर का निर्माण, भकूंप का नहीं होगा कोई असर


नई दिल्ली . अयोध्या में राम जन्मभूमि निर्माण शुरू हो गया है. इसके बाद सभी भक्तों के मन में सवाल है कि आखिर कितने समय में राम मंदिर बनकर तैयार हो जाएगा? इसका जवाब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने अपने ट्वीट में दिया. ट्रस्ट का कहना है कि मंदिर निर्माण के कार्य में लगभग 36-40 महीने का समय लगने का अनुमान है.श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ने कहा,श्री राम जन्मभूमि मंदिर के निर्माण हेतु कार्य प्रारंभ हो गया है. सीबीआरआई रुड़की और आईआईटी मद्रास के साथ मिलकर निर्माणकर्ता कंपनी एलएंडटी के अभियंता भूमि की मृदा के परीक्षण के कार्य में लगे हुए है.मंदिर निर्माण के कार्य में लगभग 36-40 महीने का समय लगने का अनुमान है.

ट्रस्ट ने बताया,श्री रामजन्मभूमि मंदिर का निर्माण भारत की प्राचीन निर्माण पद्धति से किया जा रहा है ताकि वह सहस्त्रों वर्षों तक न केवल खड़ा रहे, अपितु भूकंप, झंझावात अथवा अन्य किसी प्रकार की आपदा में भी मंदिर को किसी प्रकार की क्षति न हो.मंदिर के निर्माण में लोहे का प्रयोग नहीं होगा. श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने विश्व हिंदू परिषद मुख्यालय में प्रेसवार्ता कर बताया कि मंदिर निर्माण में पत्थरों का उपयोग होगा. पत्थरों की आयु के हिसाब से ही मंदिर की एक हजार वर्ष आयु का आकलन किया गया है. निर्माण कंपनी लार्सन एंड टूब्रो ने योग्यतम लोगों को अपने साथ जोड़ा है. चंपत राय ने कहा कि मिट्टी की ताकत नापने के लिए कंपनी ने आईआईटी चेन्नई की सलाह ली है.

60 मीटर गहराई तक की मिट्टी की जांच हुई. भूकंप आएगा तब यहां की जमीन की मिट्टी उन तरंगों को कितना झेल पाएगी, इन सब की जांच हुई है. उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण में एक ग्राम भी लोहे का प्रयोग नहीं होगा. राम मंदिर का एरिया करीब तीन एकड़ का होगा. मंदिर निर्माण में 10,000तांबे की पत्तियां व रॉड भी चाहिए. इसके लिए दानियों को आगे आने की जरूरत है. चंपत राय ने कहा कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार हर साल दो करोड़ लोग अयोध्या दर्शन के लिए आते हैं. राम मंदिर बनाने के बाद आंकड़ा काफी बढ़ जाएगा.इसकारण सरकार बस, रेल, हवाई जहाज आदि सुविधाओं के बारे में सोच रही है. हेलीकॉप्टर उतारने के लिए हवाई पट्टी भी बनेगी.