Monday , 19 April 2021

बेसहारा मवेशियों के लिए चारा उगाएगी सरकार

भोपाल (Bhopal) . बेसहारा मवेशियों को छत मुहैया कराने वाली मप्र सरकार अब उनके लिए चारा उगाएगी. ग्राम पंचायत और गांव स्तर पर चारा उगाने का काम सरपंच-सचिव और जनपद-जिला पंचायत अधिकारियों की निगरानी में होगा. यह पहली दफा होगा जब सरकार इस तरह के अनूठे प्रयास कर रही है. ग्राम पंचायत और गांवों में खाली पड़ी जमीन चारा उगाने में जो भी राशि खर्च होगी वह महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना से होगी.

मनरेगा आयुक्त ने प्रदेश के समस्त कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ और मनरेगा जिला कार्यक्रम अधिकारियों को पत्र भेजकर कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में निवासरत और मनरेगा के तहत पात्र वर्ग के लक्षित परिवारों को प्रोत्साहित किए जाने और उनकी खेती को ज्यादा लाभदायक बनाना आवश्यक है. विगत वर्षों में पशुओं की संख्या में लगातार कमी होने के प्रमुख कारणों में हरे चारे की पर्याप्त उपलब्धता न होना भी एक कारण है. इसके तहत प्रत्येक जिले को चारे की उपलब्धता में आत्मनिर्भर बनाये जाने के लिए प्रत्येक ग्राम में उपलब्ध 2 प्रतिशत गौचर भूमि में मुख्यमंत्री (Chief Minister) गौचर भूमि विकास उपयोजना के तहत काम किए जाएं.

इस तरह की है कार्ययोजना

ग्राम पंचायत क्षेत्र में उपलब्ध गोवंश की संख्या के आधार पर चारे की मात्रा का आंकलन किया जाए. उपलब्ध चारे की मात्रा को छोड़कर शेष हरे चारे के उत्पादन के लिए विकास के कार्य चरणबद्ध तरीके से किए जाने के लिए कार्ययोजना बनाई जाए. स्थल की उपयुक्तता एवं जमीनी वास्तविकता के आधार पर सह पौधारोपण केवल चारागाह के लिए उपयोग होगी. चयनित स्थल पर पानी का स्रोत होना अनिवार्य है. अत: सर्वप्रथम सिंचाई के लिए चारागाह स्थल पर या समीप में पानी का स्रोत यथा सामुदायिक कूप, तालाब, नदी नाला होने पर चेक डेम निर्माण कार्य पृथक से स्वीकृत कर विकसित किए जाएंगे. चारागाह जहां बनेगा अगर वहां व्यवस्थाएं नहीं है तो मनरेगा से पूरी व्यवस्थाएं की जाएगी.

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