Friday , 14 May 2021

पीएम मोदी के तस्वीर वाले पोस्टर लहराकर, सिंधियों ने की अलग सिंधु देश की मांग

नई दिल्ली (New Delhi) . ‘सिंधु देश’ जिसका शाब्दिक अर्थ होता है, सिंधियों के लिए अलग देश. सिंधु देश एक विचार है, जो पाकिस्तान के सिंध प्रांत में बसे और दुनिया भर में फैले सिंधियों का एक सपना है. ये सिंधी दुनिया दूसरे एथनिक समुदायों की तरह अपने लिए एक अलग देश की मांग करते आ रहे हैं. जिसतरह कुर्द अपने लिए अलग देश की मांग करते हैं, यहूदी समुदाय के लोगों ने इजरायल नाम का अपना देश बनाया है, उसी तरह सिंधी पाकिस्तान के अंदर एक निश्चित भूभाग में अपने लिए एक स्वतंत्र और सार्वभौम मातृभूमि चाहते हैं.

दरअसल सिंधु देश की मांग की कहानी 1947 से जुड़ी है. भारत को आजादी मिलने के बाद सिंधु क्षेत्र पाकिस्तान में गया और पाकिस्तान के चार प्रांतों में से एक बन गया. लेकिन इसके बाद अलग सिंधु देश की मांग 1967 से शुरू हुई जब पाकिस्तान सरकार ने यहां के निवासियों के ऊपर उर्दू भाषा थोप दी. लोगों ने इसका विरोध किया, जिसके फलस्वरूप सिंधी अस्मिता का जन्म हुआ. इन्होंने अपनी भाषा और संस्कृति की दुहाई देकर लोगों को एकजुट किया. इस मुहिम में सिंधी हिन्दू और सिंधी मुसलमान दोनों शामिल हुए.

आंदोलन को रफ्तार मिली 1972 में जब बांग्लादेश पाकिस्तान से अलग हो गया. पूर्वी बंगाल के संघर्ष से प्रेरणा लेकर सिंधी राजनेता जी एम सैयद ने जिए सिंध तहरीक नाम का संगठन गठित कर सिंधु देश का विचार अपने समर्थकों और सिंधु की स्वतंत्रता के साथ सहानुभूति रखने वाले लोगों के सामने पेश किया.

जी एम सैयद पाकिस्तान के पहले राजनेता थे जिन्होंने सिंध देश की स्वतंत्रता की मांग की थी. सिंध के खिलाफ नीतियों का विरोध करने के लिए पाकिस्तान ने उन्हें 30 साल तक कैद रखा. 26 अप्रैल 1995 को कराची में कैद के दौरान ही इनकी मृत्यु हो गई.
रविवार (Sunday) 17 जनवरी को जी एम सैयद की 117वीं जयंती के मौके पर पाकिस्तान के सिंध प्रांत के सान कस्बे में सिंधु देश की मांग के समर्थन में विशाल रैली निकाली गई. रैली में पीएम मोदी, अमेरिका के निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन, फ्रांस के राष्ट्रपति, सऊदी अरब के राजकुमार सलमान की तस्वीरें लोग लिए हुए थे. अपनी दुश्वारियों की ओर दुनिया का ध्यान खींच रहे थे. पीएम मोदी के समर्थन में तस्वीरें लिए इन लोगों ने सिंधु देश के लिए दुनिया भर के नेताओं से समर्थन की मांग की.

सिंधियों का आरोप है कि पाकिस्तान में पहचान सुरक्षित नहीं है. कि पाकिस्तान उन्हें बस उनके प्राकृतिक संसाधनों के लिए इस्तेमाल करता है. बता दें सिंध से एक मात्र राजनीतिक परिवार पाकिस्तान की सत्ता पर राज कर पाया है, वहां परिवार है भुट्टो परिवार था. बेनजीर भुट्टो के सत्ता में रहने हुए ये आंदोलन दबा रहा, लेकिन भुट्टों की मौत के बाद ये चिंगारी फिर भड़क उठी. सिंधु देश के समर्थकों का तर्क है कि सिंधु क्षेत्र सिंधु घाटी सभ्यता का केंद्र रहा है, इस पर अंग्रेजों ने अवैध कब्जा किया और 1947 में पाकिस्तान के हाथों में सौंप दिया, जहां उनपर निरंतर जुर्म हो रहा है.

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