Monday , 10 May 2021

नीलामी के लंबे अंतराल के बाद भी उत्पादन शुरू न करने वाली लौह अयस्क खानों के पट्टे निरस्त करने पर विचार

नई दिल्ली (New Delhi) . भारत सरकार के खान मंत्रालय ने ऐसी लौह अयस्क खदानों का पट्टा (लीज) रद्द करने का प्रस्ताव किया है जिनमें नीलामी के सात-आठ महीने बाद भी उत्पादन शुरू नहीं हो पाया है. इसके अलावा ऐसी खानों की लीज समाप्त करने का भी प्रस्ताव है जो लगातार तीन तिमाहियों तक न्यूनतम आपूर्ति को कायम नहीं रख पाई हैं. खान मंत्रालय का खनन नियमों में कुछ संशोधनों के जरिये ऐसा करने का प्रस्ताव है. मंत्रालय ने इस पर अंशधारकों से टिप्पणियां मांगी हैं. खान मंत्रालय ने खनिज (परमाणु और हाइड्रो कॉर्बन ऊर्जा खनिजों को छोड़कर), रियायती (संशोधन) नियम, 2021 तैयार किया है. मंत्रालय का इरादा खनिज (परमाणु और हाइड्रो कॉर्बन ऊर्जा खनिजों को छोड़कर), रियायती नियम, 2016 में संशोधन का है.

मंत्रालय ने संशाधित नियमों के मसौदे पर आम जनता, राज्यों/संघ शासित प्रदेशों की सरकारों, खनन उद्योग, अंशधारकों, उद्योग संघों और अन्य संबंधित लोगों और इकाइयों से टिप्पणियां मांगी हैं. ऐसी खानों के कई सफल बोलीदाता जिनका पिछला पट्टा 31 मार्च, 2020 को समाप्त हुआ है, वे नीलामी और उनके पक्ष में खनन पट्टा जारी किए जाने के 7-8 माह बाद भी उत्पादन शुरू नहीं कर पाए हैं. मंत्रालय ने कहा कि इसके अलावा कई अन्य सफल बोलीदाताओं ने उत्पादन शुरू तो कर दिया है लेकिन वे एमसीआर के नियम 12ए के तहत उत्पादन और आपूर्ति का स्तर कायम नहीं रख पाए हैं. 31 मार्च, 2020 को जिन परिचालन वाली और काम कर रही 46 खानों का पट्टा समाप्त हुआ था, उनमें से 24 ओडिशा में हैं. इसके अलावा सात खानें कर्नाटक (Karnataka), छह झारखंड, चार आंध्र प्रदेश, दो राजस्थान, दो गुजरात (Gujarat) और एक हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh)में हैं. ओडिशा की सभी 24 खानों और कर्नाटक (Karnataka) की चार खानों की नीलामी पिछले साल की गई थी.

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