Monday , 10 May 2021

नई नीति नहीं है स्वीकार तो व्हाट्अप का इस्तेमाल करें बंद : दिल्ली हाईकोर्ट

नई दिल्ली (New Delhi) . दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि व्हाट्सऐप की नई निजता नीति स्वीकार करना स्वैच्छिक है और यदि कोई इसकी शर्तों एवं नियमों से सहमत नहीं है, तो वह इसका इस्तेमाल नहीं करने का विकल्प चुन सकता है. पेशे से वकील एक याचिकाकर्ता ने व्हाइट्सऐप की नई निजता नीति को चुनौती दी थी, जो फरवरी में लागू होने वाली थी, लेकिन अब इसे मई तक के लिए टाल दिया गया है. न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा की पीठ ने कहा कि यह एक निजी ऐप है. इसमें शामिल नहीं हों. यह स्वैच्छिक है, इसे स्वीकार नहीं कीजिए. किसी और ऐप का इस्तेमाल कीजिए.

उच्च न्यायालय ने कहा कि यदि मोबाइल ऐप की शर्तें एवं नियम पढ़े जाएं, तो अधिकतर ऐप के बारे में यह जानकर हैरानी होगी कि ऐप इस्तेमाल करने वाले किन बातों पर सहमति जता रहे हैं. पीठ ने कहा कि यहां तक कि गूगल मैप्स भी आपके सभी डेटा को एकत्र करता है. पीठ ने कहा कि इस मामले पर विचार-विमर्श की आवश्यकता है, इसलिए समय के अभाव के कारण इस मामले को 25 जनवरी को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जा रहा है. केन्द्र सरकार ने भी पीठ की इस बात पर सहमति जताई कि इस मामले के विश्लेषण की आवश्यकता है. व्हाट्सऐप और फेसबुक की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकीलों कपिल सिब्बल व मुकुल रोहतगी ने पीठ से कहा कि यह याचिका सुनवाई योग्य नहीं है और इसमें उठाए गए कई मुद्दों का कोई आधार ही नहीं है.

उन्होंने कहा कि परिवार के सदस्यों एवं मित्रों के बीच निजी बातचीत कूट रहेगी और उसे व्हाट्सऐप एकत्र नहीं कर सकता तथा नई नीति में यह स्थिति नहीं बदलेगी. वकीलों ने कहा कि नीति में बदलाव से व्हाट्सऐप पर कारोबारी बातचीत ही प्रभावित होगी. याचिका में कहा गया है कि निजता की नई नीति संविधान के तहत निजता के अधिकारों का हनन करती है. याचिका में दावा किया गया है कि व्हाट्सऐप की निजता संबंधी नई नीति उपयोगकर्ता की ऑनलाइन गतिविधियों पर पूरी पहुंच की अनुमति देती है और इसमें सरकार की कोई निगरानी नहीं है. नई नीति के तहत उपयोगकर्ता या तो इसे स्वीकार करता है या ऐप से बाहर हो जाता है, लेकिन वे अपने डाटा को फेसबुक के स्वामित्व वाले दूसरे मंच या किसी अन्य ऐप के साथ साझा नहीं करने का विकल्प नहीं चुन सकते हैं.

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