Wednesday , 23 June 2021

दो बच्चों के जन्म पर मिल गया मातृत्व अवकाश, तीसरे बच्चे के दौरान नहीं

चंडीगढ़ (Chandigarh) . पंजाब-हरियाणा (Haryana) हाईकोर्ट ने नर्सिंग ऑफिसर को मातृत्व अवकाश न मिलने के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया कि किसी भी महिला को सिर्फ दो बच्चों के लिए ही मातृत्व अवकाश यानी मैटरनिटी लीव मिल सकती है. कोर्ट ने कहा है कि इससे फर्क नहीं पड़ता कि पहले दो बच्चे महिला के अपने हैं या नहीं.

दरअसल, महिला पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च चंडीगढ़ (Chandigarh) में कार्यरत है. महिला ने एक शख्स से शादी की जिसके पहले से ही दो बच्चे थे. अब महिला ने अपने बच्चे को जन्म दिया, तब उसे मैटरनिटी लीव नहीं मिली. इस लेकर महिला ने पीजीआईएमईआर के खिलाफ कोर्ट में याचिका दायर की थी. इस पर हाईकोर्ट में जस्टिस जसवंत सिंह और जस्टिस संत प्रकाश की पीठ ने यह आदेश सुनाया. पीजीआईएमईआर ने कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि महिला ने अस्पताल के रिकॉर्ड में अपने पति की पहली शादी से हुए दो बच्चों का नाम दर्ज करवाया हुआ है और वह कई बार चाइल्ड केअर लीव भी ले चुकी है.

अस्पताल ने सेंट्रल सिविल सर्विसेज (लीव) रूल, 1972 का हवाला देकर कोर्ट में कहा कि चूंकि महिला के पहले ही दो बच्चे हैं,इसकारण वह मातृत्व अवकाश नहीं ले सकती है.वहीं महिला का कहना था कि उसने अपने पहले बच्चे को जन्म दिया है, इसकारण पति के दोनों बच्चों का हवाला देकर अस्पताल उसे मातृत्व अवकाश से वंचित नहीं कर सकता है. नर्सिंग ऑफिसर की याचिका खारिज करते हुए बेंच ने कहा, ‘भले ही याचिकाकर्ता अपने पति की पहली शादी से जन्में दो बच्चों की बायलॉजिकल मां नहीं है लेकिन वह इस तथ्य से इनकार नहीं कर सकती कि अब वही उन बच्चों की मां है.’

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