Wednesday , 30 September 2020

उदयपुर में आयुर्वेद का नवाचार : कोरोना से बचाव व सुरक्षा के लिए आयुष अमृत की अनूठी


अमृतधारा वटी और काढ़ा बना रामबाण, एक लाख से अधिक लोग लाभान्वित

उदयपुर. वैश्विक महामारी घोषित हो चुके कोरोना वायरस के संक्रमण से जिलेवासियों और कोरोना कर्मवीरों के बचाव एवं उनकी सुरक्षा के लिए आयुर्वेद ढाल बना हुआ है. आयुर्वेद विभाग ने कोरोना महामारी से लड़ने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की दृष्टि से स्वस्फूर्त भूमिका निभाई है और इसी का परिणाम है कि दिनरात कोरोना मरीजों के बीच में काम करने वाले सैकड़ों कोरोना कर्मवीर एवं क्वारेनटाइन में रह रहे लोग वर्तमान में संक्रमण से सुरक्षित है. भारत सरकार के आयुष मंत्रालय की गाइडलाइन व राज्य सरकार के आयुर्वेद विभाग के दिशा-निर्देशानुसार 27 मार्च से ही उदयपुर के आयुर्वेद विभाग की ओर से कई नवाचार किये गए. इसके तहत जिला प्रशासन के निर्देशन में विभाग ने विभिन्न औषधियों से निर्मित काढ़े का वितरण किया गया है वहीं अमृतधारावटी (कपूरधार) का वितरण कर सम्पूर्ण जिले में कोरोना से लड़ने और बचाने के लिए अनूठी मिसाल पेश की. यह काढ़ा एवं अमृतधारावटी कोरोना काल में आमजन के लिए रामबाण साबित हुए है.

आयुर्वेद विभाग के उपनिदेशक डॉ. जनेन्द्र पाठक ने बताया कि जिले में अब तक एक लाख से अधिक लोगों को आयुर्वेदिक काढ़े के पैकेट वितरित किए जा चुके है वहीं कोरोना कर्मवाीरों को अमृतधारावटी के 22 हजार पैकेट्स वितरित करते हुए हजारों कोरोना कर्मवीरों को जीवनदान दिया है. आयुर्वेद विभाग के इस कार्यक्रम के प्रभारी और वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. शोभालाल औदीच्य ने बताया कि जिला प्रशासन के निर्देशन में शहर सहित जिले के समस्त ब्लॉक्स के सेवाएं दे रहे विभिन्न विभागीय अघिकारी-कार्मिकों सहित अन्य कोरोना कर्मवीरों की सुरक्षार्थ एवं उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए यह विशेष अभियान चलाया गया.

उन्होंने बताया कि इसके अलावा जिला प्रशासन द्वारा निर्धारित किए गये विभिन्न क्वारेनटाइन स्थलों पर रहने वाले लोगों, स्टाफ सदस्यों को भी नियमित काढ़ा पिलाया जा रहा है. इसके लिए अश्वगंधा चूर्ण एवं षडबिंदु तेल (नेजल ड्रॉप) भी दी जा रही है. पिछले दो माह में विभाग के कार्मिकों द्वारा विभिन्न जिला मुख्यालय पर स्थापित 21 क्वारेंटाईन सेंटर्स पर रह रहे 500 से अधिक कोरोना कर्मवीर तथा संबंधित 446 अन्य लोगों को प्रतिदिन सुबह-शाम मिलाकर कुल 25 हजार डोज पिलाए गए हैं.
डॉ. औदिच्य ने बताया कि किसी भी गंभीर बीमारी से लड़ने एवं उससे मुक्ति के लिए व्यक्ति का इ्यूमिनिटी सिस्टम पावरफुल होना आवश्यक है और आयुर्वेद में इसके लिए कई कारगर उपाय है. ऐसे में आवश्यक है मानव मात्र को अपनी दिनचर्या आयुर्वेद के आधार पर बनाने के लिए एवं आयुर्वेद को जीवन में अपनाने की. इसी को ध्यान में रखते हुए कोरोना जैसी महामारी में विशेष सुरक्षा प्रदान करने के लिए ये अनूठे प्रयास किए गये.

आयुर्वेद विभाग के सहायक निदेशक डॉ. राजीव भट्ट ने बताया कि सम्पूर्ण जिलें में आयुवेर्दिक काढ़े के वितरण के साथ ही लोगों को नियमित योग एवं प्राणायाम का भी अभ्यास करवाया गया ताकि मानसिक तनाव व कोरोना के भय से मुक्त रहे. इसके साथ ही संगीत को योग के साथ जोड़ा गया. डॉ. औदिच्य ने बताया कि इस सेवा कार्य में कोरोना कर्मवीर योगी अशोक जैन, जिग्नेश शर्मा, उमेश श्रीमाली, गोपाल डांगी, दरबसिंह बघेल, शारदा जालोरा, राजेन्द्र जालोरा, नरेंद्र सिंह झाला, प्रेम जैन, प्रीति सुमेरिया, नवनीत गुप्ता, निखिल गांधी, पूरण सिंह राठौड़, सीता गुप्ता, सुरेश पालीवाल, सावंत नागोरी व आयुर्वेद कम्पाउंडर कंचन डामोर, रूपलाल, अमृत लाल परमार, भूपेंद्र कुमार, भविष्य औदीच्य, गजेन्द्र आमेटा आदि सेवाएं प्रदान कर रहे हैं.