Thursday , 13 May 2021

आरएआई ने मोदी सरकार से बजट में राष्ट्रीय खुदरा नीति बनाने की मांग की

नई दिल्ली (New Delhi) . आगामी केन्द्रीय बजट से पहले, खुदरा विक्रेताओं के निकाय आरएआई ने सरकार से राष्ट्रीय खुदरा नीति बनाने एवं उस लागू करने तथा खुदरा विक्रेताओं को विभिन्न लाभ प्राप्त करने के लिए उस एमएसएमई के तहत पंजीकरण करने देने की मांग की. आरएआई का कहना है कि कोरोना महामारी (Epidemic) के दौरान लगभग पूरी तरह से तबाह होने के बाद इस उद्योग को समर्थन देने की आवश्यकता है. भारतीय फुटकर विक्रेता संघ (आरएआई) ने कहा कि लगभग 854 अरब डॉलर (Dollar) का भारतीय खुदरा उद्योग क्षेत्र महामारी (Epidemic) के कारण सबसे अधिक प्रभावित हुआ. इसमें सुधार के लिए गैर-परंपरागत समाधान और सरकारी समर्थन की आवश्यकता होगी. इसने कहा कि मौजूदा समय में, स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने और लाखों नौकरियों को बचाने के लिए खुदरा क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए सभी प्रयासों को किये जाने की आवश्यकता है.

आरएआई ने कहा कि बजट 2021-22 इसमें प्रमुख भूमिका निभाएगा. आरएआई ने कहा कि खपत अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाती है,और खुदरा क्षेत्र खपत का प्रवेश द्वार है. खुदरा व्यापार तेज गति से सुधर रहा है,इसकी गति को बनाए रखने की जरूरत है. बजट उम्मीदों के बारे में, आरएआई के सीईओ कुमार राजगोपालन ने कहा कि महामारी (Epidemic) के दौरान खुदरा उद्योग लगभग टूट गया था. अर्थव्यवस्था के खुलने के साथ धीरे-धीरे पैरों पर खड़ा हो रहा है.लेकिन रेंगने वाले उद्योग को अपने पैरों पर वापस लाने के लिए और दौड़ना शुरू करने के लिए, हमारा मानना है कि बजट में दो मुख्य चीजों पर ध्यान दिया जाना चाहिए जो खुदरा विक्रेताओं के लिए ‘कारोबार करने की आसानी’ (ईज ऑफ डूइंग बिजनेस) पैदा करेगी, विभिन्न प्रक्रियात्मक बाधाओं से आजादी मिलेगी और विकास के लिए आवश्यक धन तक पहुंच कायम होगी.’’

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